लॉटरी तय करेगी मुंबई का अगला मेयर, जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई का मेयर महायुति से ही होगा, लेकिन आरक्षण और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव संभव नहीं है. लॉटरी के जरिए आरक्षण तय होने के बाद ही मेयर चुनाव होगा.

मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नवनिर्वाचित शिवसेना पार्षदों से बातचीत के बाद बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुंबई को मेयर महायुति गठबंधन से ही मिलेगा. महायुति में भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना शामिल हैं. हालांकि, इस अहम पद को लेकर दोनों सहयोगी दलों के बीच अंदरूनी खींचतान की चर्चा भी सामने आ रही है.
शिंदे के बयान के बावजूद यह साफ है कि मुंबई को फिलहाल तुरंत मेयर नहीं मिलने वाला. इसकी वजह मेयर चुनाव से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है. मेयर का चुनाव नई महानगरपालिका के औपचारिक गठन के बाद ही शुरू हो सकता है. जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मेयर पद के लिए किसी भी तरह की औपचारिक घोषणा संभव नहीं है.
पार्षद चुनते हैं मेयर
मुंबई में मेयर का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि चुने गए पार्षद इस पद के लिए मतदान करते हैं. लेकिन यह चुनाव भी तभी हो सकता है, जब मेयर पद के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो जाए. आरक्षण तय होने से पहले राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं कर सकते.
मेयर का पद आरक्षण के दायरे में आता है. जब तक यह तय नहीं हो जाता कि यह पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती. आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया अपनाई जाती है और इसके बाद ही सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होती है. यही कारण है कि इस सप्ताह मुंबई को नया मेयर मिलने की संभावना काफी कम मानी जा रही है.
क्या है मेयर पद के लिए आरक्षण व्यवस्था?
देश के अधिकांश शहरी स्थानीय निकायों में मेयर पद को अलग-अलग वर्गों के लिए बारी-बारी से आरक्षित किया जाता है. इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल होता है. यह पहले से तय नहीं रहता कि अगला मेयर किस वर्ग से होगा. हर कार्यकाल में इसका फैसला नई लॉटरी के जरिए किया जाता है.
आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया अपनाने का मकसद निष्पक्षता बनाए रखना है. इससे यह आरोप नहीं लगते कि सरकार या कोई राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए आरक्षण में बदलाव कर रहा है. लॉटरी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी वर्गों को समान अवसर मिले और कोई एक वर्ग लगातार इस पद पर काबिज न रहे.
रोटेशन प्रणाली का क्या उद्देश्य है?
मेयर पद पर आरक्षण और रोटेशन की व्यवस्था 74वें संवैधानिक संशोधन के बाद लागू हुई. इस संशोधन के तहत शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और नेतृत्व के पदों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य किया गया. महाराष्ट्र में नगर निगम अधिनियम के तहत ओबीसी वर्ग को भी इस आरक्षण में शामिल किया गया है.


