ग्रीनलैंड विवाद को लेकर यूरोपीय संघ का ट्रंप पर हमला, अमेरिका पर 93 बिलियन यूरो टैरिफ का ऐलान

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इस कदम से अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक, राजनीतिक और रणनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिस पर EU और कनाडा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं. डेनमार्क के स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड पर ट्रंप पहले भी खुलकर दावा करते रहे हैं. उनका कहना रहा है कि अमेरिका केवल किसी समझौते से नहीं, बल्कि मालिकाना हक के साथ ही ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है. अब इस मुद्दे पर ट्रंप ने आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है. 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका 1 फरवरी से कई यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा. इस सूची में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन शामिल हैं. ट्रंप के अनुसार, शुरुआत में 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे 1 जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा.

यूरोपीय संघ की आपात बैठक

ट्रंप के इस ऐलान के बाद यूरोपीय संघ में हलचल तेज हो गई है. रविवार को बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में यूरोपीय संघ के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई गई. बैठक में जर्मनी और फ्रांस समेत कई देशों ने ट्रंप के बयान की कड़ी आलोचना की और इसे दबाव और ब्लैकमेल की नीति करार दिया.

वहीं, फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका की इस धमकी के जवाब में ऐसे कदम उठा सकता है, जिनका अब तक इस्तेमाल नहीं किया गया है. रिपोर्टों के अनुसार, यूरोपीय देश अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर करीब 93 अरब यूरो तक का टैरिफ लगाने या फिर अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय बाजार से बाहर करने जैसे विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. माना जा रहा है कि स्विट्जरलैंड के डावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भी इस मुद्दे पर रणनीति तैयार की जा सकती है.

हालांकि यूरोपीय संघ के भीतर सभी देश एक जैसे सख्त कदमों के पक्ष में नहीं हैं. कुछ राजनयिकों का कहना है कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका के खिलाफ सीधी टकराव की नीति सही नहीं होगी. उनका मानना है कि पहले कूटनीतिक रास्ते तलाशे जाने चाहिए. यदि अमेरिका 1 फरवरी से टैरिफ लागू करता है, तभी जवाबी कार्रवाई पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

बढ़ता सैन्य और राजनीतिक तनाव

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव के बीच कई यूरोपीय देशों ने आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा दी है. इससे यह संकेत मिलता है कि मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है.

कनाडा की चिंता

इस पूरे विवाद पर कनाडा ने भी चिंता जताई है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि उनका देश हमेशा क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में रहा है. उनके मुताबिक, ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क को है. उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे शांति और संवाद के जरिए सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए.

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