सऊदी अरब और UAE में से किसका साथ देगा पाकिस्तान? दो इस्लामी देशों के बीच 'पिस' रहे शहबाज ने किया बड़ा ऐलान

सऊदी अरब और यूएई के बीच पुराने सहयोगी संबंधों में गहरी खाई पैदा हो गई है. इस तनाव के बीच पाकिस्तानी पीएम ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की और एक खास निर्णय ली.

मध्य पूर्व में इन दिनों बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी अरब के हवाई हमलों ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच पुराने सहयोगी संबंधों में गहरी खाई पैदा कर दी है. इस घटना के बाद पाकिस्तान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है.

यमन में बढ़ता संकट

यमन लंबे समय से गृहयुद्ध की चपेट में है. हाल ही में सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर हमला किया, जहां यूएई से आई एक खेप को निशाना बनाया गया.  सऊदी का दावा है कि ये हथियार और सैन्य वाहन यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) नामक अलगाववादी समूह के लिए थे. 

यह समूह दक्षिण यमन को अलग देश बनाने की मांग करता है. इस हमले से यमन में नया मोर्चा खुल सकता है, जहां हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाली ताकतें आपस में भिड़ सकती हैं. यमन पहले से ही गंभीर मानवीय संकट झेल रहा है. 

शहबाज शरीफ ने क्राउन प्रिंस से की बात 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की. इस बातचीत में शहबाज ने सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता जताई। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, शहबाज ने क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया.

दोनों नेताओं ने पाकिस्तान-सऊदी संबंधों को और मजबूत करने की बात कही. क्राउन प्रिंस ने अगले साल पाकिस्तान आने की इच्छा भी जताई। इस कॉल से साफ है कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ खड़ा है.

पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती

पाकिस्तान के लिए यह स्थिति आसान नहीं है. उसके सऊदी अरब और यूएई दोनों से गहरे रिश्ते हैं. सऊदी ने पाकिस्तान को आर्थिक मदद और रक्षा समझौते दिए हैं, जबकि यूएई ने बड़े निवेश का वादा किया है. शहबाज शरीफ ने यूएई राष्ट्रपति से भी हाल ही में मुलाकात की थी, जहां क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश हुई. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यमन में हिंसा पर चिंता जताई और सऊदी की सुरक्षा तथा यमन की एकता का समर्थन किया. 

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