बलूचिस्तान से गायब हो रहे लोग, किसी का कुछ पता नहीं, चिंतित हो रहे परिजन...जानें डेथ स्कवॉड से क्या है कनेक्शन

बलूचिस्तान में कुछ लोगों के अचानक से गायब होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. असल में एक छापेमारी के दौरान इन सभी को उठा लिया गया है. जानकारी के अनुसार इस मामले में पाकिस्तान सुरक्षा एजेंसियों के शामिल होने की आशंका है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : बलोचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. पंजगुर और कराची जैसे क्षेत्रों से आम नागरिकों के अचानक लापता होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि सुरक्षा एजेंसियों और सरकार समर्थित सशस्त्र गुटों ने निर्दोष लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में ले लिया है. अपनों की तलाश में भटकते परिजनों की सिसकियाँ अब सड़कों पर कड़े विरोध प्रदर्शनों में बदल गई हैं.

पंजगुर में खौफनाक छापेमारी

आपको बता दें कि पंजगुर के पुलाबाद इलाके में हाल ही में हुई एक सैन्य छापेमारी ने स्थानीय आबादी को दहशत में डाल दिया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ अज्ञात बंदूकधारी अचानक घरों में घुस आए और बिना किसी वारंट के छह लोगों को उठाकर ले गए. इनमें इनायत और रशीद नाम के व्यक्तियों की पहचान की गई है, जबकि बाकी चार के ठिकाने का अब तक कोई पता नहीं चल सका है. इन सभी को अज्ञात स्थानों पर भेजा गया है, जिससे उनके जीवन पर संकट गहरा गया है.

डेथ स्क्वॉड का बढ़ता आतंक

इन अपहरणों में केवल सरकारी सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं, बल्कि 'डेथ स्क्वॉड' के नाम से कुख्यात हथियारबंद गुटों की संलिप्तता भी सामने आ रही है. आरोप है कि इन गुटों को सरकार का गुप्त समर्थन प्राप्त है. 13 फरवरी को 23 वर्षीय जुल्फिकार को बाजार से इसी तरह अगवा कर लिया गया था. जुल्फिकार के पिता हमीद और उनका पूरा परिवार अब न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन उन्हें कहीं से भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही है.

मामला बड़े शहरों तक पहुंच रहा मामला 

बलोच युवाओं को निशाना बनाने का यह सिलसिला अब बड़े शहरों तक भी पहुंच गया है. पिछले साल दिसंबर में पंजगुर के ही एक होनहार छात्र जाकिर नूर को कराची से जबरन उठा लिया गया था. बलोच मानवाधिकार संगठन 'पांक' ने इस घटना की निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि जाकिर को बिना किसी कानूनी दस्तावेज के हिरासत में लिया गया था. शिक्षा के लिए शहर आए युवाओं का इस तरह रहस्यमयी ढंग से गायब होना बलोचिस्तान के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगाता है.

सड़कों पर परिजनों का संघर्ष

अपने प्रियजनों की तस्वीरों को सीने से लगाए माताएं और बहनें अब न्याय की गुहार लेकर सड़कों पर उतर आई हैं. कराची से लेकर पंजगुर के सुदूर इलाकों तक विरोध प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यदि उनके परिजनों ने कोई अपराध किया है, तो उन्हें अदालत में पेश किया जाए. प्रशासन की चुप्पी और जानकारी के अभाव ने परिजनों के मन में किसी बड़ी अनहोनी के डर को और अधिक बढ़ा दिया है.

न्याय के लिए वैश्विक पुकार

बलोचिस्तान में नागरिकों के गायब होने का यह क्रम पुराना है, लेकिन हालिया घटनाओं ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है. मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप कर जवाबदेही तय करने की अपील की है. बिना किसी कानूनी आधार के लोगों को उठाना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण भी है. जब तक न्याय प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक इन पीड़ित परिवारों की आंखों के आंसू नहीं सूख सकेंगे.

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