PM Modi Israel visit : नेसेट में PM मोदी के संबोधन से पहले विपक्षी सांसदों ने किया वॉकआउट! सामने आई ये बड़ी वजह
इजरायल की संसद में विपक्षी सांसदों ने पीएम नेतन्याहू और नेसेट स्पीकर के खिलाफ वॉकआउट किया. हालांकि, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने के लिए सदन में वापस लौटे और भारत के प्रति गहरा सम्मान जताया.

नई दिल्ली : इजरायल की संसद 'नेसेट' में बुधवार को एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने कूटनीति और राजनीति के जानकारों को हैरान कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रतीक्षित संबोधन से ठीक पहले विपक्षी सांसदों ने सामूहिक रूप से सदन से बाहर जाने का फैसला लिया. हालांकि, यह विरोध प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नहीं, बल्कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और नेसेट के स्पीकर की कार्यप्रणाली के विरोध में था. जैसे ही मोदी के भाषण का वक्त आया, विपक्षी नेता यायर लैपिड के नेतृत्व में सभी सांसद सम्मानपूर्वक वापस लौट आए.
वॉकआउट का मुख्य कारण
विपक्ष के इस कड़े और अचानक लिए गए फैसले का मुख्य केंद्र नेसेट के स्पीकर आमिर ओहाना का एक प्रशासनिक निर्णय था. दरअसल, स्पीकर ने इस विशेष सत्र के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष जस्टिस इसाक अमित को आमंत्रित नहीं करने का फैसला किया था. विपक्षी खेमे ने इसे देश की संवैधानिक गरिमा और स्थापित लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला उल्लंघन माना. इसी नाराजगी के कारण उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार किया, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री के सम्मान में उन्होंने अपनी रणनीति अलग रखी.
यायर लैपिड की गरिमामय पहल
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने मंच संभाला, विपक्ष के कद्दावर नेता यायर लैपिड ने विशेष रूप से आगे बढ़कर उनसे गर्मजोशी से हाथ मिलाया. लैपिड ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी भारत या मोदी से कतई संबंधित नहीं थी. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रभावशाली नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि संकट के कठिन समय में इजरायल के साथ खड़ा होने के लिए वहां की जनता भारत की अत्यंत आभारी है. उनके अनुसार यह गठबंधन सनातन है.
नेसेट में दुर्लभ एकता का दृश्य
सदन के भीतर सत्ता पक्ष की ओर से हो रही नारेबाजी और हंगामे के बावजूद, विपक्षी सांसदों ने अपना आचरण संतुलित रखा. बेनी गैंट्ज़ की अगुवाई वाली पार्टी ने भी आधिकारिक रूप से स्पीकर के पक्षपाती आचरण की तीखी आलोचना की, परंतु भारतीय प्रधानमंत्री की उपस्थिति को देखते हुए वे सदन में मौजूद रहे. यह इजरायली संसदीय इतिहास का एक ऐसा विरल क्षण था, जहाँ गहरे आंतरिक मतभेदों के बावजूद किसी विदेशी राष्ट्रप्रमुख के सम्मान में पूरा विपक्ष एकमत होकर अपनी सीटों पर लौट आया.
विपक्षी दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया
'येश आतिद' और 'यिसरायल बेयतेनु' जैसे प्रभावशाली विपक्षी संगठनों ने एक साझा बयान जारी कर इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ की. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के लिए ही सदन में वापस आए हैं ताकि भारत और इजरायल की अटूट मित्रता का उचित सम्मान किया जा सके. विपक्षी नेताओं का यह भी आरोप था कि इजरायल की आंतरिक राजनीति की वजह से एक वैश्विक स्तर के नेता को बेवजह विवादों के साये में लाने की कोशिश की गई.
भारत के प्रति अटूट वैश्विक प्रतिबद्धता
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर यह दृढ़ संदेश दिया है कि इजरायल में भारत की स्वीकार्यता किसी एक दल या सरकार तक सीमित नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान सदन का पूरी तरह भरा होना यह प्रमाणित करता है कि भारत वहां का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है. विपक्ष ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत के प्रति उनका आदर भाव सर्वोपरि है. यह सफल दौरा अब दोनों देशों के बीच भविष्य के और अधिक प्रगाढ़ और ऊर्जस्वित संबंधों की एक नई गाथा लिखेगा.


