मध्य-पूर्व में तनाव के बीच चीन ने 57 इस्लामी देशों को दिलाया भरोसा, कहा- मुस्लिम देशों के साथ मिलकर रोकेंगे 'जंगल का कानून'

ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच चीन ने अपनी राजनीतिक कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. चीनी उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री वांग यी ने 57 देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन(OIC) के महासचिव के साथ बीजिंग में बातचीत की है. यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब मिडिल-ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और सैन्य टकराव की आशंकाएं बढ़ रही है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और अमेरिका–ईरान के बीच तीखी बयानबाज़ी के माहौल में चीन ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं. इसी क्रम में चीन के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति वांग यी ने 57 सदस्य देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के महासचिव से बीजिंग में महत्वपूर्ण बातचीत की. यह बैठक ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और सैन्य टकराव की आशंकाएं गहराती जा रही हैं.

ईरान को लेकर बढ़ती तल्खी बनी बैठक की...

यह कूटनीतिक संवाद उस समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम की ओर बढ़ता दिख रहा है. हाल ही में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी थी कि ईरान पर किसी भी तरह के सैन्य हमले को पूर्ण युद्ध के रूप में देखा जाएगा. इस बयान ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें पश्चिम एशिया पर टिक गई हैं.

ट्रंप का बयान और अमेरिकी नौसैनिक तैनाती
इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने एहतियातन ईरान की दिशा में एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा तैनात किया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को आंतरिक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई या परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने से बचना चाहिए. इन बयानों को क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.

ईरान में विरोध प्रदर्शन और मौतों के दावे
तनाव के बीच ईरान के भीतर हालात भी गंभीर बने हुए हैं. एक ईरानी अधिकारी ने दावा किया है कि आर्थिक हालात के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे क्षेत्र में अस्थिरता की तस्वीर और गहरी हो गई है.

चीन का रुख: संवाद और राजनीतिक समाधान पर जोर
बीजिंग में हुई बैठक के दौरान वांग यी ने मध्य-पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर बल दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन का मानना है कि सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ते हैं, जबकि बातचीत और सहयोग ही स्थायी स्थिरता का रास्ता दिखा सकते हैं.

‘जंगल के कानून’ की ओर बढ़ती दुनिया पर चीन की चिंता
वांग यी ने कहा कि चीन इस्लामी देशों के साथ मिलकर विकासशील देशों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक हालात दुनिया को “जंगल के कानून” की ओर धकेल रहे हैं, जहां ताकतवर देश मनमाने फैसले लेते हैं. उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि एकतरफा टैरिफ और दबाव की राजनीति अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर कर रही है.

अमेरिका की सैन्य तैयारियां जारी
दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में एक विमानवाहक पोत और कई मिसाइल-युक्त युद्धपोत मध्य-पूर्व क्षेत्र में पहुंच सकते हैं. यह तैनाती क्षेत्र में शक्ति संतुलन को और संवेदनशील बना सकती है.

चीन खुद को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश में
विशेषज्ञों का मानना है कि OIC के साथ चीन की यह बातचीत केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि बीजिंग खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करना चाहता है. विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है. ऐसे में चीन की यह पहल आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

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