पाकिस्तान में एक हफ्ते में तीसरी बार कांपी धरती, खैबर-पख्तूनवा में महसूस हुए भूकंप के झटके

Earthquake: पाकिस्तान में एक हफ्ते के भीतर तीसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. सोमवार को खैबर-पख्तूनवा और आसपास के इलाकों में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया. लोग डरकर घरों से बाहर निकल आए, हालांकि जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

Earthquake: पाकिस्तान में एक बार फिर धरती हिली है। बीते एक हफ्ते के अंदर यह तीसरी बार है जब देश में भूकंप के झटके महसूस किए गए. सोमवार को खैबर-पख्तूनवा और आसपास के कई इलाकों में भूकंप आया, जिससे लोग डरकर घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों की ओर भागे. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर गहराई में था। भूकंप के लगातार आ रहे झटकों ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है.

कई शहरों में महसूस हुए झटके

सोमवार को आए भूकंप के झटके खैबर-पख्तूनवा और उसके आसपास के क्षेत्रों में महसूस किए गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि झटके आने के बाद लोग दहशत में घरों से बाहर निकल गए। हालांकि अब तक किसी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है.

पिछले एक हफ्ते में तीसरी बार आया भूकंप

30 अप्रैल 2025 को भी पाकिस्तान में भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे, जिसकी तीव्रता 4.4 थी। वहीं 3 मई 2025 को अफगानिस्तान में आए भूकंप का असर भी पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में देखा गया, जिसकी तीव्रता 4.3 थी। इन दोनों झटकों के बाद अब तीसरा झटका पाकिस्तान को फिर से झकझोर गया है.

इससे पहले 12 अप्रैल को आया था तेज भूकंप

इससे पहले 12 अप्रैल को भी पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में भूकंप महसूस किया गया था, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 दर्ज की गई थी। लगातार आ रहे भूकंप ने देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में भय का माहौल बना दिया है.

अमेरिका के टेक्सास में भी आया भूकंप

इसी दौरान अमेरिका के पश्चिमी टेक्सास में भी शनिवार रात को 5.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। यह झटका न्यू मैक्सिको के व्हाइट्स सिटी से करीब 35 मील दक्षिण में आया, लेकिन कम आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण लोगों पर इसका सीमित असर रहा.

प्रशासन अलर्ट, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

भूकंपों की लगातार श्रृंखला को देखते हुए पाकिस्तानी आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाके टेक्टोनिक प्लेटों की संवेदनशीलता के कारण बार-बार कंपन का शिकार हो सकते हैं.

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