'उन्होंने हमें गले लगाया, उल्टा हमने छूरा भोंका', भारत के साथ रिश्ते पर भड़के पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ने भारत-पाकिस्तान रिश्ते पर दो टूक जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि हमने भारत को धोखा दिया, जंग लड़ी इसके बाद भी भारत ने हमें गले लगाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के साथ तुरंत संबंध में सुधार करना चाहिए.

Kamal Kumar Mishra

India-Pakistan Relations: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा है कि वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इन संबंधों में अचानक सकारात्मक बदलाव भी हो सकते हैं. उन्होंने यह विचार लाहौर में आयोजित एक कार्यक्रम ‘पाकिस्तान-भारत संबंध : वर्तमान स्थिति और आगे की राह’ के दौरान साझा किए. कसूरी का मानना था कि दोनों देशों के लिए अपने विवादों को शांति और बातचीत के जरिए हल करना ही सबसे अच्छा रास्ता है.

कसूरी ने उल्लेख किया कि करगिल युद्ध के बाद भी दोनों देशों ने शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू किया था. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही वर्तमान स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन शांति की प्रक्रिया पर काम करना संभव है और अगर यह अवसर चूक जाता है तो यह दुख की बात होगी. उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर पहले से एक चार सूत्रीय समाधान का खाका मौजूद है, जिसे दोनों देशों ने स्वीकार किया था.

अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह का दिया उदाहरण

कसूरी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों के दौरान की गई शांति प्रक्रिया का जिक्र किया और कहा कि दोनों देशों के बीच शांति की आवश्यकता भारत की अधिकांश जनता महसूस करती है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान-भारत संबंधों में अचानक बदलाव आ सकते हैं, जैसा कि पहले करगिल युद्ध के बाद हुआ था. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भारत ने युद्ध के बाद सम्मानपूर्वक स्वीकार किया और शांति के लिए बातचीत शुरू की थी.

पीएम मोदी ने भी किया प्रयास

कसूरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से लाहौर में मुलाकात की थी, जो सबके लिए एक बड़ा आश्चर्य था. उन्होंने बताया कि 2021 में मोदी के पाकिस्तान यात्रा की खबरें भी थीं, जिसमें वे शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए इमरान खान से मुलाकात करने वाले थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह यात्रा नहीं हो सकी. कसूरी का मानना है कि भविष्य में भी ऐसे अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों में सुधार ला सकती हैं, और उन्होंने इस संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं किया.

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