हम तीनों मिलकर लिखेंगे ग्लोबल साउथ का भविष्य...रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत यात्रा पर बोला चीन
चीन ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को सकारात्मक बताया है और इसे भारत-रूस-चीन त्रिपक्षीय सहयोग के लिए लाभकारी बताया है. चीन ने भारत के साथ स्थिर और दीर्घकालिक संबंध बनाने की इच्छा जताई.

नई दिल्ली : चीन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे त्रिपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया है. चीन ने तीनों देशों भारत, रूस और खुद को ग्लोबल साउथ का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि इन देशों के बीच अच्छे संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए लाभकारी होंगे. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि तीनों उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं के सदस्य हैं और इनके बीच मैत्रीपूर्ण सहयोग से सभी पक्षों को लाभ होगा.
भारत-चीन संबंधों में दीर्घकालिक दृष्टिकोण
4-5 दिसंबर को भारत आए थे पुतिन
रूस-भारत संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे. यह उनकी 2021 के बाद पहली भारत यात्रा थी. यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया.
द्विपक्षीय मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं
पुतिन ने भारतीय मीडिया इंटरव्यू में कहा कि भारत और चीन आपसी विवादों का समाधान स्वयं निकाल सकते हैं और रूस को उनके द्विपक्षीय मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. चीन ने पुतिन की इस टिप्पणी को प्रमुखता से प्रकाशित किया और स्पष्ट किया कि वह रूस और भारत दोनों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. इसके अलावा, पुतिन ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी आरोपों को भी खारिज किया, जिसे चीनी मीडिया ने प्रमुखता से प्रस्तुत किया.
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
चीन के लिए यह भी अहम है कि रूस का सबसे बड़ा तेल-गैस खरीदार होने के नाते उसने यूक्रेन युद्ध के लिए रूस पर अमेरिकी पाबंदियों को नजरअंदाज करते हुए आयात जारी रखा. इस पृष्ठभूमि में पुतिन की भारत यात्रा और भारत-चीन-रूस के त्रिपक्षीय सहयोग की बातें चीन के रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं. इस यात्रा और बातचीत के बाद स्पष्ट हुआ कि ग्लोबल साउथ में भारत, रूस और चीन की साझेदारी न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी विश्व स्तर पर संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी.


