ट्रंप घिरे एपस्टीन स्कैंडल में! फाइल्स जारी होते ही गायब, व्हाइट हाउस ने जारी किया बयान

अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को एपस्टीन केस से जुड़े 30 लाख से अधिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की घोषणा की, जो अब तक का सबसे बड़ा खुलासा माना जा रहा है. इसने अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन की राजनीतिक और व्यावसायिक दुनिया में भी सनसनी फैला दी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिका में बदनाम फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से संबंधित मामला फिर से सुर्खियों में है, जो राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा उथल-पुथल पैदा कर रहा है. अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को एपस्टीन केस से जुड़े 30 लाख से अधिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की घोषणा की, जो अब तक का सबसे बड़ा खुलासा माना जा रहा है. इसने अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन की राजनीतिक और व्यावसायिक दुनिया में भी सनसनी फैला दी है. हालांकि, ट्रंप से जुड़ी फाइलों को लेकर न्याय विभाग विवादों में घिर गया है. टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से एक अत्यंत संवेदनशील फाइल कुछ घंटों में ही वेबसाइट से हटा ली गई और बाद में पुनः अपलोड की गई. इस फाइल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ यौन उत्पीड़न के अप्रमाणित आरोपों का उल्लेख था, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया.

अमेरिकी डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि जारी दस्तावेजों में लगभग 2,000 वीडियो और 1 लाख 80 हजार से अधिक तस्वीरें शामिल हैं. हालांकि, इनमें से कई हिस्सों को गोपनीयता और कानूनी वजहों से काला कर दिया गया है.

क्या हैं एपस्टीन फाइल्स?

न्याय विभाग के अनुसार, कुल 60 लाख से ज्यादा पन्नों को प्रासंगिक माना गया था. इनमें FBI और न्याय विभाग के ईमेल, साक्षात्कार रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट्स, तस्वीरें, वीडियो और जब्त डिजिटल डेटा शामिल हैं. जांच के बाद करीब 35 लाख पन्ने जारी किए गए हैं. इन दस्तावेजों में बड़ी मात्रा में अश्लील सामग्री भी है, जो एपस्टीन के व्यक्तिगत उपकरणों से बरामद की गई थी. कुछ फाइलें इसलिए रोक दी गईं क्योंकि वे चल रही जांचों, पीड़ितों की गोपनीयता और चिकित्सा रिकॉर्ड से जुड़ी हैं.

ट्रंप को लेकर घिरा न्याय विभाग

इन फाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सैकड़ों बार उभरा है. हालांकि, न्याय विभाग और व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि इनमें कई आरोप अप्रमाणित हैं और इनका कोई कानूनी आधार नहीं मिला है. जिस दस्तावेज को अस्थायी रूप से हटाया गया, उसमें FBI द्वारा अगस्त 2025 में तैयार की गई एक सूची थी. यह लिस्ट FBI के नेशनल थ्रेट ऑपरेशंस सेंटर को प्राप्त शिकायतों पर आधारित थी. इनमें डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर लेकिन अप्रमाणित आरोप दर्ज थे. सबसे गंभीर आरोप यह था कि करीब तीन दशक पहले न्यू जर्सी में एक 13 या 14 साल की लड़की को ट्रंप की ओर से यौन कृत्य के लिए मजबूर किया गया. यह दावा कथित पीड़िता की एक ‘अज्ञात महिला दोस्त’ ने किया था. दस्तावेजों में यह भी लिखा है कि इस जानकारी का कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया.

दस्तावेजों के अनुसार, ये शिकायतें विभिन्न समयों पर दर्ज की गई थीं, जिनमें से कुछ 35 साल पुरानी हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से किसी भी टिप के सत्यापन का कोई प्रमाण दस्तावेजों में नहीं है. स्प्रेडशीट के साथ जुड़े एक ईमेल में लिखा गया था, ‘यह वह लिस्ट है जो मैंने व्हिटनी को NTOC से आए ट्रंप के आरोप लगाने वालों के नामों के साथ भेजी थी.’ माना जा रहा है कि यह ईमेल FBI के न्यूयॉर्क फील्ड ऑफिस से अगस्त 2025 में भेजा गया था.

FBI ने क्या किया?

रिकॉर्ड के अनुसार, FBI ने इस शिकायत को वॉशिंगटन ऑफिस को भेजा था ताकि गवाह का साक्षात्कार लिया जा सके. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह साक्षात्कार हुआ या नहीं और उसका परिणाम क्या रहा. दस्तावेजों में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि FBI ने इन आरोपों को विश्वसनीय माना हो. अन्य आरोपों में कथित ‘ऑर्जी पार्टियों’ का भी उल्लेख है, लेकिन इनमें आरोप लगाने वालों की पहचान, समय और सबूतों को लेकर कोई ठोस विवरण नहीं दिया गया है. कई मामलों में FBI अधिकारी आरोप लगाने वालों से संपर्क तक नहीं कर पाए और एक मामले में व्यक्ति को ‘विश्वसनीय नहीं’ माना गया.

फाइल क्यों हटाई गई और फिर क्यों अपलोड हुई?

न्याय विभाग ने ब्रिटिश अखबार को बताया कि संबंधित दस्तावेज ‘वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक’ के कारण अस्थायी रूप से डाउन हो गया था और अब फिर से ऑनलाइन है. हालांकि, इस दौरान सोशल मीडिया पर आरोपों की काफी चर्चा हो चुकी थी. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने स्वीकार किया कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों की समीक्षा में गलतियां हो सकती हैं और यदि किसी रेडैक्शन में चूक हुई है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा.

ट्रंप पर व्हाइट हाउस की क्या है सफाई?

न्याय विभाग और व्हाइट हाउस दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कुछ दस्तावेजों में ट्रंप के खिलाफ ‘झूठे और सनसनीखेज’ दावे शामिल हैं, जो 2020 के चुनाव से ठीक पहले FBI को भेजे गए थे. बयान में कहा गया कि "ये दावे पूरी तरह निराधार हैं और अगर इनमें जरा भी सच्चाई होती, तो इन्हें पहले ही ट्रंप के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा चुका होता."

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