US Iran Attack: ईरान के नेताओं पर टारगेटेड हमले की तैयारी? अमेरिका का मिलिट्री ब्लूप्रिंट सामने

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की ईरान के खिलाफ सैन्य तैयारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिलिट्री प्लानिंग एडवांस स्टेज में है और इसमें ईरानी नेताओं को टारगेट करने से लेकर संभावित “रिजीम चेंज” तक के विकल्प शामिल बताए जा रहे हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से ऐसी जानकारी सामने आई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की एडवांस स्टेज की तैयारी में जुटा है. इस प्लान में ईरान के अलग-अलग नेताओं को निशाना बनाने से लेकर, आदेश मिलने पर तेहरान में सरकार बदलने का विकल्प भी शामिल बताया जा रहा है.

मीडिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका गंभीर सैन्य टकराव के लिए तैयार हो सकता है. हालिया संकेत बताते हैं कि ईरान के सुरक्षा ठिकानों और परमाणु ढांचे पर हफ्तों तक चलने वाला ऑपरेशन भी योजना का हिस्सा हो सकता है.

एडवांस स्टेज पर पहुंची मिलिट्री प्लानिंग

दो अमेरिकी अधिकारियों ने, संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर, कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य योजना अब उन्नत चरण में है. इस योजना में टारगेटेड हमलों के जरिए प्रमुख नेताओं को निशाना बनाने का विकल्प शामिल है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि राष्ट्रपति Donald Trump आदेश देते हैं, तो तेहरान में "रिजीम चेंज" यानी सरकार बदलने की रणनीति पर भी अमल किया जा सकता है. हालांकि किन व्यक्तियों को निशाना बनाया जाएगा या बिना बड़े ग्राउंड फोर्स के यह कैसे संभव होगा, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है.

डिप्लोमैसी फेल होने पर सैन्य विकल्प

सूत्रों के मुताबिक, यह सैन्य विकल्प इस बात का संकेत है कि अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों के असफल होने की स्थिति में व्यापक लड़ाई के लिए तैयार है. पिछले सप्ताह यह खबर भी सामने आई थी कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले अभियान की तैयारी कर रही है, जिसमें सुरक्षा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की संभावना शामिल है.

हाल के दिनों में ट्रंप ने इस्लामिक रिपब्लिक में सरकार बदलने के विचार को सार्वजनिक रूप से रखा है. हालांकि अपने राष्ट्रपति अभियान के दौरान उन्होंने पिछली सरकारों की उन नीतियों से दूरी बनाने की बात कही थी, जिनमें अफगानिस्तान और इराक में सैन्य हस्तक्षेप कर सरकारें गिराने के प्रयास शामिल थे.

मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में भारी मात्रा में हथियार और सैन्य संसाधन तैनात किए हैं. इनमें वॉरशिप्स और फाइटर एयरक्राफ्ट प्रमुख हैं. किसी भी बड़े बमबारी अभियान में अमेरिकी बेस्ड बॉम्बर्स का समर्थन अहम भूमिका निभा सकता है.

अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2020 में ईरान के शीर्ष जनरल Qasem Soleimani पर हमले को मंजूरी देकर टारगेटेड किलिंग की नीति का संकेत दिया था. सुलेमानी Islamic Revolutionary Guard Corps की विदेशी जासूसी और पैरामिलिट्री शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करते थे.

ट्रंप प्रशासन ने 2019 में आधिकारिक रूप से IRGC को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था. यह पहली बार था जब वॉशिंगटन ने किसी अन्य देश की सैन्य इकाई को इस श्रेणी में रखा था.

इजरायल की कार्रवाई और अमेरिकी रणनीति

एक अमेरिकी अधिकारी ने पिछले वर्ष ईरान के साथ 12 दिन की लड़ाई के दौरान इजरायल द्वारा ईरानी नेताओं को निशाना बनाने में मिली सफलता का उल्लेख किया था. उस दौरान क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि आर्ड फोर्सेज चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल मोहम्मद बाघेरी समेत कम से कम 20 वरिष्ठ कमांडर मारे गए थे.

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका के पास ईरानी नेतृत्व के बारे में कितनी ठोस खुफिया जानकारी है, जिसके आधार पर वह टारगेटेड ऑपरेशन चला सके.

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कूटनीति की संभावना से इनकार नहीं किया है. उन्होंने गुरुवार को कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो “बहुत बुरी चीजें होंगी.”

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