'दबाव में नहीं झुकेंगे', रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर पुतिन का दो टूक जवाब
US-Russia relations: रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी प्रतिबंधों को शत्रुतापूर्ण बताया और कहा कि रूस किसी दबाव में नहीं झुकेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि हमले पर कड़ा जवाब दिया जाएगा. अमेरिका ने रूस की तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जबकि ट्रंप ने चीन-भारत पर टैरिफ बढ़ाकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया.

US-Russia relations: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस किसी भी देश वाशिंगटन के दबाव में नहीं झुकेगा. पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि रूसी क्षेत्र पर कोई हमला होता है, तो उसका बेहद गंभीर और जबरदस्त जवाब दिया जाएगा.
अमेरिकी प्रतिबंधों को पुतिन ने बताया शत्रुतापूर्ण कदम
पुतिन ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए ताजा प्रतिबंध शत्रुतापूर्ण और अमित्र कार्रवाई हैं, जो रूस-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के बजाय और अधिक कमजोर करेंगी. उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का रूस की अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह रूस पर दबाव बनाने की कोशिश है, लेकिन कोई भी स्वाभिमानी देश दबाव में आकर फैसला नहीं लेता. हमारा ऊर्जा क्षेत्र मज़बूत है और अपनी दिशा में आत्मविश्वास से काम कर रहा है.
बढ़ती वैश्विक कीमतें
रूसी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक ऊर्जा संतुलन बिगड़ा, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा. पुतिन के अनुसार, इससे अमेरिका जैसे देशों को घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों में कठिनाई होगी.उन्होंने आगे कहा कि यदि यूक्रेन अमेरिका से प्राप्त लंबी दूरी की टॉमहॉक मिसाइलों का उपयोग रूसी क्षेत्र पर हमला करने में करता है, तो रूस की प्रतिक्रिया बेहद कठोर और निर्णायक होगी.
अमेरिका ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों पर कसे शिकंजे
अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में रोसनेफ्ट और लुकोइल रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. इनका उद्देश्य मास्को के युद्ध वित्तपोषण को सीमित करना और यूक्रेन में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए दबाव बनाना है. यह कदम ऐसे समय में आया है जब रूस ने बड़े पैमाने पर परमाणु अभ्यास किया है. यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन के बीच प्रस्तावित दूसरे शिखर सम्मेलन की देरी के ठीक एक दिन बाद की गई.अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने इन प्रतिबंधों के तहत दोनों कंपनियों और उनकी कई सहायक इकाइयों को निशाने पर लिया है.
क्या बोले ट्रंप?
राष्ट्रपति ट्रंप ने इन प्रतिबंधों को बहुत सख्त और प्रभावी बताया. उन्होंने कहा कि ये हमारी रणनीति का हिस्सा हैं. हमें उम्मीद है कि ये ज्यादा समय तक नहीं रहेंगे क्योंकि अंततः युद्ध खत्म होना चाहिए. मुझे लगा कि अब कार्रवाई का समय आ गया है. रोसनेफ्ट तेल अन्वेषण, शोधन और वैश्विक बिक्री में सक्रिय है, जबकि लुकोइल, एक निजी बहुराष्ट्रीय कंपनी, तेल और गैस के उत्पादन, विपणन और वितरण का कार्य करती है.
भारत और चीन पर भी बढ़ा अमेरिकी दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के आर्थिक स्रोतों पर अंकुश लगाने के लिए चीन और भारत पर भी दबाव बढ़ा दिया है. जो रूस के प्रमुख तेल आयातक हैं. उन्होंने चीन से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त 100% शुल्क लगाने की घोषणा की है, जबकि भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लागू किया गया है. ट्रंप ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य रूस को वित्तीय रूप से कमजोर करना और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ठोस परिणाम लाना है. चीन ने इस पर जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है, जबकि भारत ने साफ कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होगी.
संभावित समझौते की उम्मीद
हालांकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका भारत पर लगे टैरिफ को घटाकर 15-16% कर सकता है, ताकि नई दिल्ली रूस से तेल आयात कम करे. दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाए गए इन कठोर आर्थिक कदमों के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अभी तक कोई बड़ा झटका नहीं लगा है. ट्रंप का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना है और वे इसे अपने कार्यकाल में हासिल करना चाहते हैं.


