ईरान में पारंपरिक चाय में दूध क्यों नहीं डालते, जानिए वजह

ईरान में पारंपरिक चाय हमेशा ब्लैक टी के रूप में पी जाती है, जिसमें दूध नहीं डाला जाता ताकि चाय का असली स्वाद, रंग और खुशबू बनी रहे. खास अवसरों पर जाफरान (केसर) चाय और फूलों की चाय भी बनाई जाती हैं, जिन्हें मीठा या शहद मिलाकर परोसा जाता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

ईरान सिर्फ अपने तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, वास्तुकला, परंपराओं और मेहमान नवाजी के लिए भी जाना जाता है. यहां के पारंपरिक व्यंजन भी बेहद खास माने जाते हैं. अगर आप भारत में बनने वाली ईरानी चाय के स्वाद से परिचित हैं, जिसमें अक्सर दूध मिलाया जाता है, तो ईरान में चाय बिल्कुल अलग रूप में तैयार की जाती है, जिसमें दूध का इस्तेमाल नहीं होता. 

ईरान में लोग ब्लैक टी क्यों पीते हैं?

भारत में अधिकांश लोग चाय में दूध मिलाकर पीना पसंद करते हैं, लेकिन ईरान में पारंपरिक तौर पर ब्लैक टी ही पिया जाता है. इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि दूध डालने से चाय का असली स्वाद, रंग और खुशबू बदल जाती है. ईरानी लोग चाय को उसकी शुद्ध और प्राकृतिक स्थिति में पीना पसंद करते हैं ताकि उसके स्वाद और सुगंध का पूरा अनुभव हो सके.

एक और कारण यह भी है कि ईरानी संस्कृति में चाय के साथ नमकीन स्नैक्स के बजाय मीठा खाना पसंद किया जाता है, जैसे खजूर. दूध वाली चाय और मीठा स्नैक का स्वाद मेल नहीं खाता, इसलिए लोग चाय में दूध डालने से बचते हैं.

ईरान में रोजमर्रा की जिंदगी में लोग सामान्य ब्लैक टी पीते हैं, जिसे सिर्फ चाय पत्ती और कभी-कभी दालचीनी या इलायची डालकर तैयार किया जाता है. खास अवसरों पर ईरान में जाफरान चाय यानी केसर चाय बनाई जाती है. इसे परिवारिक समारोह, शादियों या किसी विशेष अवसर पर परोसा जाता है. केसर के धागों को पीसकर उसमें थोड़ी चीनी या नमक मिलाया जाता है, फिर इसे गर्म पानी में घोलकर उबलती चाय में डाला जाता है. सर्विंग के समय स्वादानुसार चीनी एड की जा सकती है.

ईरान में गोल गवज़बान फूलों की चाय प्रचलित

इसके अलावा, ईरान में गोल गवज़बान फूलों की चाय भी प्रचलित है. इसमें शहद या चीनी मिलाकर मिठास बढ़ाई जा सकती है और नींबू डालकर इसे ताजगीपूर्ण बनाया जाता है. लोग इसे अक्सर शाम के समय पीना पसंद करते हैं. इस तरह, ईरानी चाय संस्कृति अपने अनोखे स्वाद और परंपरा के कारण भारत से काफी अलग है. यहां की चाय में दूध नहीं डालने की परंपरा और मीठे स्नैक्स के साथ इसका मेल इसे विशेष बनाता है.

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