मौनी अमावस्या पर घर में रहकर कैसे करें पूजा? महिलाओं के लिए जानिए खास नियम
सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को आत्म-शुद्धि, आत्म-अनुशासन और अपने पूर्वजों को याद करने के लिए एक बहुत ही पवित्र अवसर माना जाता है. यह दिन मन, वाणी और कर्म मानव अस्तित्व के इन तीन पहलुओं की शुद्धि का प्रतीक है.

मौनी अमावस्या 2026: सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को आत्मशुद्धि, संयम और पितृ स्मरण का अत्यंत पावन पर्व माना जाता है. यह दिन मन, वाणी और कर्म तीनों की शुद्धि का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर विधिपूर्वक पूजा, तर्पण और साधना करने से पितरों को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है.
वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगा. इस विशेष तिथि पर यदि किसी कारणवश गंगा स्नान संभव न हो, तो घर में रहकर भी पूजा और साधना के माध्यम से पूर्ण पुण्य फल प्राप्त किया जा सकता है. खासतौर पर महिलाओं के लिए इस दिन कुछ नियम और परंपराएं मानी जाती हैं, जिनका पालन घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक माना जाता है.
मौनी अमावस्या पर घर में क्या करें?
मौनी अमावस्या के दिन घर की शुद्धता और पवित्रता का विशेष महत्व होता है. इस दिन सुबह से ही पूरे घर की साफ-सफाई करनी चाहिए. पूजा स्थल, रसोई, आंगन और घर के सभी सामान्य स्थानों को स्वच्छ रखना केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि आंतरिक और मानसिक शुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है.
घर में दीपक जलाएं, धूप और अगरबत्ती से वातावरण को पवित्र करें. परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर साधना, ध्यान और मंत्र जाप करें. महिलाएं इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और अनावश्यक कार्य, शोर-शराबा व नकारात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए रखें. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक माहौल बना रहता है.
महिलाओं के लिए विशेष नियम और सावधानियां
मौनी अमावस्या पर महिलाओं के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. इस दिन उपवास रखना शुभ माना जाता है, जो शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है. यदि उपवास संभव न हो, तो हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए.
भोजन बनाते समय शुद्ध सामग्री का उपयोग करें और पूरे परिवार के लिए श्रद्धा भाव से भोजन अर्पित करें. महिलाओं को मौन का पालन करना चाहिए और क्रोध, जल्दबाजी या नकारात्मक विचारों से स्वयं को दूर रखना चाहिए. पूजा के समय स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें तथा परिवार के प्रति धैर्य, संयम और सकारात्मक व्यवहार बनाए रखें.
पूजा, तर्पण और साधना का महत्व
मौनी अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है. महिलाएं इस दिन शुद्ध जल से स्नान कर कुश, तिल और जल के माध्यम से पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण कर सकती हैं. श्रद्धा भाव से किया गया तर्पण आत्मिक शुद्धि और पुण्य वृद्धि का माध्यम माना जाता है.
साधना और जप के समय मन को शांत और एकाग्र रखें. इस दिन दान-पुण्य करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है. विधिपूर्वक की गई पूजा, तर्पण और साधना से पितरों को शांति मिलती है और घर में सुख, सौभाग्य, मानसिक शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.


