काली राम मूर्ति, राजा का शाही दरबार और सीता जी का कुआं...रहस्यों से भरे भारत के ये मंदिर जिनकी कहानियां चौंका देंगी

अयोध्या के भव्य राम मंदिर के अलावा भारत में कई छिपे हुए पवित्र राम मंदिर हैं, जो कम लोगों को पता हैं लेकिन गहरी आस्था और रोचक इतिहास से भरे हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

भारत जहां असंख्य देवी-देवताओं के मंदिर श्रद्धा और आस्था के केंद्र बने हुए हैं. देश के हर कोने में किसी न किसी रूप में ईश्वर की उपस्थिति महसूस की जा सकती है, लेकिन करोड़ों हिंदुओं के हृदय में भगवान राम का स्थान सर्वोच्च और परम-पूजनीय माना जाता है.

भगवान राम, जिन्हें भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है, महर्षि वाल्मीकि की रामायण के नायक हैं और उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहा गया है. अयोध्या के भव्य राम मंदिर के अलावा भी भारत में कई ऐसे प्रसिद्ध राम मंदिर हैं, जहां जीवन में एक बार जरूर दर्शन करने की परंपरा और आस्था जुड़ी हुई है.

भद्राचलम का सीता राम चंद्रस्वामी मंदिर

दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य में गोदावरी नदी के तट पर स्थित भद्राचलम का सीता राम चंद्रस्वामी मंदिर अत्यंत पूजनीय माना जाता है. इस मंदिर में भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण की मूर्तियां विराजमान हैं. तीनों देवताओं की एक साथ उपस्थिति भक्तों के मन और आत्मा को शांति प्रदान करती है और पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ सच्चे मन से यहां प्रार्थना करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

यह स्थान आध्यात्मिक दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भगवान राम अपने वनवास काल के दौरान यहां आए थे. रामनवमी जैसे पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्तों का कहना है कि भगवान की दिव्य ऊर्जा आज भी मंदिर परिसर में अनुभव की जा सकती है.

नासिक, महाराष्ट्र का कालाराम मंदिर

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित कालाराम मंदिर भगवान राम के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है. इस मंदिर का निर्माण आध्यात्मिक गुरु और भगवान राम के महान भक्त सरदार रंगराज ओढेकर ने करवाया था. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से परिवार में मेल-जोल बढ़ता है, मन को शांति मिलती है, कठिन समय दूर होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान राम की मूर्ति का रंग काला है, जिसे स्थानीय लोग ‘कालाराम’ कहते हैं. यह सात फीट ऊंची प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित है.

मंदिर में आने वाले भक्त पूजा से पहले पवित्र गोदावरी नदी में स्नान करते हैं. लोक मान्यता है कि भगवान राम अपने वनवास के दौरान इसी नदी में स्नान किया करते थे. यह मंदिर उसी स्थान पर बना है, जहां भगवान राम ने वनवास काल में कुछ समय बिताया था. इसका निर्माण 1782 में सरदार रंगराव ओढेकर ने एक पुराने लकड़ी के ढांचे के स्थान पर कराया था. कहा जाता है कि भगवान राम की इस प्रतिमा को बनाने में 12 साल लगे और रोजाना 2000 लोग इस कार्य में लगे रहते थे.

मध्य प्रदेश के ओरछा में श्रीराम राजा का मंदिर

मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित श्रीराम राजा का मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. यहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है और उन्हें प्रेम व सम्मान से ‘राम राजा’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ओरछा का शासक. यहां भगवान राम को प्रतिदिन पुलिस द्वारा रॉयल गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाता है. ऐतिहासिक रूप से यह स्थान एक शाही महल था, जिसे 16वीं सदी के अंत में बुंदेला वंश के राजा मधुकर शाह ने बनवाया था.

कहानियों के अनुसार, रानी गणेश कुंवर अयोध्या से भगवान राम की मूर्ति ला रही थीं, लेकिन भगवान के आदेश के कारण आगे यात्रा नहीं हो सकी. तभी यह निर्णय लिया गया कि इस महल को ही मंदिर में परिवर्तित कर दिया जाएगा. आज देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं.

पंजाब के अमृतसर में श्रीराम तीरथ मंदिर

पंजाब के अमृतसर में स्थित श्रीराम तीरथ मंदिर आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक गुरुओं का कहना है कि यह वही स्थान है, जहां कभी महर्षि वाल्मीकि का आश्रम था और यहीं रामायण की रचना हुई थी. इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि लव-कुश का जन्म स्थान भी यही था.

मंदिर के समीप स्थित एक प्राचीन कुएं को लेकर मान्यता है कि सीता देवी रोजाना यहां अपने दैनिक कार्य किया करती थीं. भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस पवित्र स्थल पर भगवान राम की पूजा करने से संतान सुख, आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक समृद्धि की प्राप्ति होती है.

Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.

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