Padma Awards 2026: पवित्रता, ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक है पद्म पुरस्कार, जानें नाम के पीछे का आध्यात्मिक अर्थ
पद्म पुरस्कार केवल नागरिक सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक दर्शन का प्रतीक हैं. कमल की तरह ये सम्मान उन व्यक्तियों को मिलते हैं जो सांसारिक स्वार्थ से ऊपर उठकर निस्वार्थ भाव से समाज और देश की सेवा करते हैं.

Padma Awards: हर साल जब भारत सरकार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों की घोषणा करती है, तो पूरे देश में गर्व की भावना जागृत होती है. कला, साहित्य, समाज सेवा और विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से नवाजा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन पुरस्कारों के पीछे केवल एक मेडल या प्रशस्ति पत्र नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और जीवन दर्शन छिपा हुआ है?
पद्म पुरस्कारों की आधिकारिक शुरुआत 1955 में हुई थी, और तब से आज तक, ये पुरस्कार न केवल उपलब्धि का प्रतीक बने हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन को भी उजागर करते हैं. आइए जानें इस पुरस्कार का गहरा आध्यात्मिक मतलब.
पद्म: कीचड़ से उत्पन्न पवित्रता का प्रतीक
पद्म शब्द संस्कृत का है, जिसका अर्थ होता है "कमल का फूल". भारतीय संस्कृति में कमल का फूल केवल एक साधारण पुष्प नहीं, बल्कि यह पवित्रता, ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक है. भारत के राष्ट्रीय पुष्प के रूप में कमल को सम्मानित किया गया है. पद्म पुरस्कारों का नामकरण भी इस कारण हुआ, क्योंकि ये पुरस्कार कमल के प्रतीक के रूप में हैं.
कमल का फूल कीचड़ में पैदा होता है, लेकिन वह उससे कभी प्रभावित नहीं होता, बल्कि अपनी पवित्रता और सुंदरता को बनाए रखता है. ठीक वैसे ही, पद्म पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति समाज की कठिनाइयों, भौतिकतावादी जीवन और सांसारिक दौड़ के बावजूद, निस्वार्थ भाव से अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं. वे बाहरी दुनिया की चकाचौंध और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और मानवता के लिए काम करते हैं.
गीता में भी है उल्लेख
भारतीय अध्यात्म में गीता का एक महत्वपूर्ण संदेश है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,” यानी हमें केवल कर्म करने का अधिकार है, लेकिन इसके फल की चिंता नहीं करनी चाहिए. कमल का फूल इस दृष्टांत का आदर्श रूप है, क्योंकि वह जल में रहते हुए भी खुद को उस जल से दूषित नहीं होने देता.
पद्म पुरस्कार उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने अपने कर्म को बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के, केवल देश और समाज की सेवा में निभाया है. मां सरस्वती और लक्ष्मी का आसन भी कमल पर होता है, जो यह संकेत है कि सच्चा सम्मान और समृद्धि तब आती है जब ज्ञान और संपन्नता के साथ-साथ विनम्रता और शुद्धता का पालन किया जाता है.
पद्म पुरस्कारों का ऐतिहासिक सफर
पद्म पुरस्कारों की शुरुआत 2 जनवरी 1954 को हुई थी. पहले इन्हें "पहला वर्ग", "दूसरा वर्ग" और "तीसरा वर्ग" के रूप में जाना जाता था. लेकिन 8 जनवरी 1955 को एक आधिकारिक घोषणा के बाद, इन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री के नाम से सम्मानित किया गया.
पुरस्कारों की श्रेणियां:
पद्म विभूषण: असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए (दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान)
पद्म भूषण: उच्चतम श्रेणी की विशिष्ट सेवा के लिए
पद्म श्री: किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए
एक भावपूर्ण सम्मान
जब राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में किसी गुमनाम नायक को पद्म सम्मान मिलता है, तो वह सिर्फ उस व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता के प्रति उसकी निस्वार्थ सेवा का सम्मान होता है. यह पुरस्कार यह सिखाता है कि महानता शोर मचाने में नहीं, बल्कि शांति और समर्पण से अपने कार्य को निभाने में होती है. कमल के फूल की तरह, जो जल में रहकर भी जल से अछूता रहता है, पद्म पुरस्कार विजेता भी सांसारिक और भौतिक सुख-साधनों से ऊपर उठकर अपनी कर्तव्यनिष्ठा को निभाते हैं.


