सकट चौथ 2026: तिथि से लेकर जानिए कब रखें व्रत, पूजा विधि और चंद्रमा उदय का समय
कल सकट चौथ का पावन त्योहार है. इस खास दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगल कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चंद्र दर्शन का महत्व सबसे ज्यादा होता है. आइए जानते हैं कि आज चांद कितने बजे दिखेगा और कैसे करें पूजन.

नई दिल्ली: माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला सकट चौथ का पर्व माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख और स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, माघी चौथ, तिलकुट चतुर्थी और वक्रतुंडी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है.
हर साल की तरह इस बार भी सकट चौथ की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. पंचांग और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार इस बार सकट चौथ का व्रत किस दिन रखा जाएगा, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आई है.
सकट चौथ का धार्मिक महत्व
माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस दिन माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण करती हैं. मान्यता है कि इस व्रत से संतान को दीर्घायु और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.
इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा और इसके बाद सिंह राशि में प्रवेश करेगा. साथ ही सर्वार्थसिद्धि योग और आयुष्मान योग का संयोग बनेगा, जो 6 जनवरी की रात 08:21 बजे से शुरू होगा. मघा और अश्लेषा नक्षत्र के साथ प्रीति योग का भी निर्माण हो रहा है.
सकट चौथ व्रत की विधि
नारद पुराण में सकट चौथ व्रत की विधि का उल्लेख मिलता है. इसमें बताया गया है कि माघ कृष्ण चतुर्थी को संकष्टी व्रत रखा जाता है. व्रत करने वाला सुबह उपवास का संकल्प लेकर चंद्रोदय तक नियमों का पालन करता है और मन को संयम में रखता है.
शाम को चंद्रमा के उदय के समय मिट्टी की गणेश मूर्ति बनाकर उसकी स्थापना की जाती है. गणेश जी के साथ उनके आयुध और वाहन का भी पूजन किया जाता है. विधिपूर्वक पूजा के बाद मोदक और गुड़ से बने तिल के लड्डू का भोग लगाया जाता है. इसके पश्चात सकट चौथ की कथा पढ़ी जाती है. तिल का विशेष महत्व होने के कारण इसे तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है.
कब है सकट चौथ का व्रत
सकट चौथ की तिथि को लेकर फैले भ्रम के बीच पंचांग के अनुसार यह स्पष्ट है कि वर्ष 2026 में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी को ही रखा जाएगा. पंचांग के मुताबिक संकष्टी चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से होगी और इसका समापन 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा.
चूंकि इस व्रत में शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, इसलिए संध्या काल में चतुर्थी तिथि का होना आवश्यक है. 6 जनवरी की शाम को चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उसी दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना गया है. 7 जनवरी को व्रत रखना मान्य नहीं माना गया है.
सकट चौथ पूजा विधि और भोग
यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संतान की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर उन्हें तिल और गुड़ से बने तिलकुट और तिल के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाता है.
माघ मास में तिल का विशेष महत्व होता है. इस दिन तिल और गुड़ से तिलकुटा बनाकर बकरे की आकृति बनाई जाती है. व्रत के बाद सास को बायने में पूरी, तिलकुटा, तिल से बनी चीजें, कपड़े, पैसे और सुहाग का सामान देकर आशीर्वाद लिया जाता है. इसी के साथ व्रत पूर्ण माना जाता है.
सकट चौथ पूजा के शुभ मुहूर्त
राहुकाल: दोपहर 3:12 से 4:31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक
अमृत काल: सुबह 10:44 से दोपहर 12:16 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:37 से 06:25 बजे तक
सकट चौथ पर चांद कब निकलेगा
सकट चौथ का चंद्रमा आमतौर पर देर रात को निकलता है. वर्ष 2026 में सकट चौथ के दिन चंद्रमा रात 9 बजकर 25 मिनट पर उदय होगा. स्थान के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है. दिल्ली में चंद्रमा के रात 9:00 से 9:30 बजे के बीच निकलने की संभावना है.
Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.


