Sakat Chauth 2026: आज सकट चौथ पर रहेगा भद्रा का साया, जानें समय और पूजा का शुभ मुहूर्त
आज माघ कृष्ण चतुर्थी पर सकट चौथ व्रत मनाया जा रहा है. गणेश पूजा से संतान सुख और बाधा निवारण की कामना की जाती है. व्रत चंद्र दर्शन के बाद रात्रि 8:54 बजे खोला जाएगा.

नई दिल्ली: आज मंगलवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे सकट चौथ के रूप में मनाया जाता है. यह व्रत भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और घर-परिवार के कष्ट दूर होते हैं. सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं.
सकट चौथ का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह भगवान गणेश की प्रिय तिथि है. सकट चौथ के दिन गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. इस दिन व्रती महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलती हैं.
आज कब तक रहेगा भद्रा का प्रभाव
पंचांग के अनुसार आज 6 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर 8 बजकर 3 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा. माना जाता है कि भद्रा के समय कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए. चूंकि इस दौरान चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा, इसलिए भद्रा का प्रभाव पृथ्वी पर भी माना जाएगा. इसके अलावा आज दोपहर 3 बजकर 3 मिनट से 4 बजकर 21 मिनट तक राहुकाल रहेगा, इस समय भी पूजा से बचना बेहतर होता है.
सकट चौथ पूजा के शुभ मुहूर्त
आज सकट चौथ पर पूजा के लिए दिनभर में कई शुभ समय उपलब्ध हैं. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:48 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है. वहीं विजय मुहूर्त 2:11 से 2:53 बजे तक रहेगा. शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 5:36 से 6:04 बजे तक रहेगा, जो दीपदान और संध्या पूजा के लिए अच्छा समय है. सायाह्न संध्या 5:39 से 7:01 बजे तक मानी गई है.
इसके अलावा अमृत काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा. निशिता मुहूर्त रात 12 बजे से 12:54 बजे तक (7 जनवरी) रहेगा, जो विशेष पूजा के लिए महत्वपूर्ण होता है. आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी सुबह 7:15 से 12:17 बजे तक बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है.
चंद्र दर्शन का समय
सकट चौथ व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है. आज चंद्रमा रात 8 बजकर 54 मिनट पर दिखाई देगा. इसी समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है. माना जाता है कि चंद्र दर्शन के बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता.
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है. इसमें दी गई तिथि, मुहूर्त, योग और समय स्थानीय पंचांग, स्थान और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.


