वह अपने पिता सचिन की तरह बल्लेबाजी करता है, अर्जुन तेंदुलकर की बल्लेबाजी से क्यों प्रभावित हुए योगराज सिंह
सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर भारी दबाव के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में जुटे हैं. तेज गेंदबाज के साथ उनकी बल्लेबाजी क्षमता भी चर्चा में है, जबकि आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में उन्हें नए मौके मिलने की उम्मीद है.

नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट में शायद ही कोई युवा खिलाड़ी ऐसा रहा हो, जिस पर अर्जुन तेंदुलकर जितना भारी उम्मीदों का बोझ रहा हो. क्रिकेट को भगवान की तरह पूजने वाले सचिन तेंदुलकर के बेटे होने का मतलब सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि हर कदम पर तुलना, आलोचना और खुद को साबित करने की चुनौती भी है. अर्जुन ने अब तक के अपने करियर में इस दबाव को करीब से महसूस किया है और वे लगातार अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं.
तेज गेंदबाज के रूप में बनाई पहचान
अर्जुन तेंदुलकर को आमतौर पर एक बाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में जाना जाता है. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में गोवा की ओर से खेलते हुए खुद को स्थापित करने की कोशिश की है. आईपीएल में भी वे कुछ मौकों पर मैदान पर नजर आए और अब आईपीएल 2026 से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) का हिस्सा बन चुके हैं. यह बदलाव उनके करियर के लिए एक नया मौका माना जा रहा है, जहां उन्हें खुद को साबित करने का मंच मिल सकता है.
बल्लेबाजी में भी छुपा है दम
हालांकि अर्जुन को गेंदबाजी के लिए जाना जाता है, लेकिन उनकी बल्लेबाजी को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शतक लगाना इस बात का सबूत है कि उनके खेल में बहुमुखी प्रतिभा मौजूद है. बचपन से सचिन तेंदुलकर जैसे महान बल्लेबाज का मार्गदर्शन मिलना उनके खेल पर असर न डाले, ऐसा संभव नहीं लगता.
योगराज सिंह ने खोले राज
भारतीय घरेलू क्रिकेट के चर्चित कोच और पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह ने अर्जुन तेंदुलकर की बल्लेबाजी को लेकर बड़ा खुलासा किया है. योगराज ने बताया कि अर्जुन अपने करियर के शुरुआती दौर में कुछ हफ्तों के लिए उनसे ट्रेनिंग लेने आए थे. योगराज के अनुसार, उन्होंने अर्जुन को पहली बार बल्लेबाजी करते देखा और वे काफी प्रभावित हुए. नेट्स में अर्जुन लगातार चौके-छक्के लगा रहे थे. योगराज ने यहां तक कहा कि अर्जुन की बल्लेबाजी शैली काफी हद तक उनके पिता सचिन तेंदुलकर जैसी है.
रणजी में शतक
योगराज सिंह ने यह भी याद किया कि कुछ ही दिनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद अर्जुन ने रणजी ट्रॉफी में अपने डेब्यू मैच में शतक जड़ दिया था. यह उपलब्धि खास इसलिए थी क्योंकि उन्होंने अपने पिता की तरह पहले ही रणजी मैच में शतक लगाया. हालांकि इसके बाद अर्जुन का बल्लेबाजी रिकॉर्ड बहुत शानदार नहीं रहा. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका औसत करीब 21 के आसपास है और वे अब तक सिर्फ दो अर्धशतक ही लगा पाए हैं. इसके बावजूद योगराज का मानना है कि उन्हें बल्लेबाजी में और मौके मिलने चाहिए थे.
आईपीएल में मौका न मिलने की टीस
योगराज सिंह ने यह भी दावा किया कि उन्होंने मुंबई इंडियंस को संदेश भेजकर अर्जुन को 2-3 मैचों में ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में आजमाने की सलाह दी थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई. उनके अनुसार, अर्जुन जैसे खिलाड़ी को सिर्फ गेंदबाज के तौर पर सीमित कर देना उसके टैलेंट के साथ नाइंसाफी है.
आगे का रास्ता अभी खुला
26 साल के अर्जुन तेंदुलकर के लिए भारतीय टीम का दरवाजा भले ही अभी दूर हो, लेकिन उनके पास समय और मौके दोनों हैं. घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन और आईपीएल में सही मौके उन्हें नई पहचान दिला सकते हैं. सचिन तेंदुलकर का बेटा होना भले ही उनके लिए चुनौती हो, लेकिन अगर अर्जुन अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं, तो वे अपनी अलग कहानी जरूर लिख सकते हैं.


