UGC नियमों पर रोक का अखिलेश यादव ने किया स्वागत, जानें बीएसपी नेता मायावती का क्या है इस पर रुख?

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और BSP प्रमुख मायावती ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाने का स्वागत किया. कोर्ट ने नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग के लिए खुला बताते हुए 2026 के नए विनियम स्थगित किए.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

लखनऊः उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी हालिया इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाने के निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि न्याय में किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और कानून की भाषा स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए.

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सच्चे न्याय में किसी पर अन्याय नहीं होता, और माननीय न्यायालय ने ठीक यही सुनिश्चित किया है. यह केवल नियमों की बात नहीं है, बल्कि उनके पीछे छिपे इरादे की भी बात है."

सपा प्रमुख ने यह भी जोर दिया कि किसी पर अत्याचार, ज़ुल्म या अन्याय न हो, और यह सुनिश्चित करना कानून का मूल उद्देश्य होना चाहिए. उनका कहना था कि नियम यदि अस्पष्ट होंगे या दुरुपयोग के लिए खुले होंगे तो समाज में अन्याय और असमानता बढ़ सकती है.

मायावती ने क्या कहा?

वहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को उचित बताया. उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जाति आधारित घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लागू किए गए नए नियम सामाजिक तनाव का कारण बन गए थे.

मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा, "वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय पूरी तरह उचित है. यदि UGC ने नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लिया होता और प्राकृतिक न्याय के तहत उच्च जातियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया होता, तो समाज में तनाव उत्पन्न नहीं होता."

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नए UGC नियम प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और दुरुपयोग के लिए खुले हैं, जिससे समाज में विभाजन और गलत प्रभाव पड़ सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसका खतरनाक प्रभाव शिक्षा क्षेत्र और समाज में समानता पर पड़ेगा.

कोर्ट ने आदेश दिया कि नए विनियम 2026 को स्थगित किया जाए और 2012 के पुराने विनियम लागू रहें. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमलय बागची की पीठ ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया और सुझाव दिया कि प्रख्यात न्यायविदों की समिति द्वारा नियमों की पुनः समीक्षा की जाए. नोटिस का जवाब 19 मार्च तक देना अनिवार्य है.

विरोध प्रदर्शन

नए नियमों की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए. छात्रों और सामाजिक संगठनों ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की. कई लोगों ने दावा किया कि नए नियम "गैर-समावेशी" हैं और कुछ श्रेणियों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखते हैं.

इस विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून और नियम समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए होने चाहिए, न कि विभाजन और विवाद पैदा करने के लिए. अदालत ने यह भी कहा कि नियमों को लागू करने में पारदर्शिता और सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी.

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