तलाक से जुड़े सवाल पर अपर्णा यादव की चुप्पी, बोलीं- सवाल व्यक्तिगत है...

हरदोई में अपर्णा यादव ने निजी मामलों पर टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे विषय सार्वजनिक बहस के नहीं होते. धार्मिक, प्रशासनिक और सामाजिक विवादों में उन्होंने जांच, संयम और कानून के समान पालन पर जोर दिया.

Shraddha Mishra

हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने मीडिया के सवालों पर संतुलित और स्पष्ट रुख अपनाया. व्यक्तिगत और संवेदनशील मुद्दों से दूरी रखते हुए उन्होंने कहा कि कुछ विषय निजी होते हैं और उन पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचना ही बेहतर होता है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई.

मीडिया ने जब अपर्णा यादव से प्रतीक यादव से जुड़े तलाक संबंधी सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह एक निजी मामला है. उन्होंने बताया कि इसी कारण वह इस तरह के सवालों से बच रही हैं. जब उनसे दोबारा पूछा गया कि सोशल मीडिया पर मामला चर्चा में होने के बावजूद वे टिप्पणी क्यों नहीं कर रहीं, तो अपर्णा यादव ने शांत लहजे में कहा कि चूंकि सवाल व्यक्तिगत है, इसलिए उस पर बोलना उचित नहीं होगा.

धार्मिक और प्रशासनिक मामलों में जांच पर जोर

अपर्णा यादव ने आगे कहा कि धार्मिक और प्रशासनिक विवादों में जांच ही सही और संवैधानिक रास्ता है. शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद और मुख्यमंत्री पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में चार शंकराचार्यों की परंपरा आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई है. 

ऐसे में यह एक तथ्यात्मक विषय है कि किसी व्यक्ति के पास शंकराचार्य की उपाधि है या नहीं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस विषय में उनके पास पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए बिना तथ्यों के कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.

कानून-व्यवस्था सबके लिए समान

अपर्णा यादव ने साफ कहा कि किसी भी आयोजन, मेले या धार्मिक कार्यक्रम में यदि प्रशासनिक व्यवस्था में कमी रह जाती है, तो उसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दो टूक कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है और कानून सभी के लिए बराबर है. उन्होंने कहा कि कुंभ या अन्य बड़े सनातन मेलों में भारी संख्या में आम लोग शामिल होते हैं. ऐसे में अगर कहीं अव्यवस्था होती है, तो वह गंभीर जांच का विषय बनता है. इस तरह के मामलों में छींटाकशी या मुख्यमंत्री के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग गलत है.

संतों से संयम की अपेक्षा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर बात करते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि वे स्वयं एक संत हैं और संतों से अपेक्षा की जाती है कि वे संयम और मर्यादा बनाए रखें. उन्होंने कहा कि गुस्से या उत्तेजना में दिए गए बयान स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं.

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वैधता पर सवाल उठाया है, तो उन्होंने साफ किया कि उनका ऐसा कोई उद्देश्य नहीं है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की गुरु परंपरा और शंकराचार्य व्यवस्था की जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है, लेकिन किसी को वैध या अवैध ठहराना उनका मकसद नहीं है.

मुरादाबाद की घटना पर कड़ी कार्रवाई की मांग

मुरादाबाद में एक हिंदू लड़की को बुर्का पहनाए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag