काला कानून वापस लो...UGC और शंकराचार्य के अपमान मामले को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने पद से दिया इस्तीफा

प्रयागराज माघ मेले में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार से नाराज और UGC के नियमों के खिलाफ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के मौके पर सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अग्निहोत्री के द्वारा अचानक उठाए गए इस कदम से प्रशासनिक और राजनीतिक हलके में हड़कंप मच गया है. 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस के अवसर पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. एक कार्यरत अधिकारी द्वारा इस तरह सार्वजनिक रूप से असंतोष जताते हुए पद छोड़ना असामान्य माना जा रहा है. उनके इस कदम को हालिया घटनाओं और नीतिगत फैसलों के खिलाफ विरोध के रूप में देखा जा रहा है.

माघ मेले की घटना से आहत हुए अधिकारी

आपको बता दें कि अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे की वजह प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुई एक कथित घटना को बताया. उनके अनुसार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ब्राह्मण बटुक शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और कथित रूप से उनकी चोटी और शिखा पकड़कर मारपीट की गई. उन्होंने इसे सनातन परंपरा और संत समाज के सम्मान पर सीधा प्रहार बताया.

ब्राह्मण समाज में चोटी का धार्मिक महत्व 
उनका कहना है कि ब्राह्मण समाज में चोटी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है और इस तरह का व्यवहार केवल व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि पूरी परंपरा पर आघात है. एक ब्राह्मण और प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते उन्होंने इस घटना को व्यक्तिगत अपमान के रूप में भी देखा. 

कार्रवाई न होने से बढ़ी नाराजगी
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की भूमिका बेहद निराशाजनक रही. उनके मुताबिक, इतने गंभीर मामले के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे समाज में गलत संदेश गया. यही चुप्पी और उदासीनता उनके आक्रोश की बड़ी वजह बनी.

UGC के नए नियमों पर कड़ा विरोध
इस्तीफे की दूसरी बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए यूजीसी (UGC) के नए रेगुलेशन बताए गए हैं. अलंकार अग्निहोत्री का आरोप है कि इन नियमों में सामान्य वर्ग को संदेह की दृष्टि से देखा गया है और कुछ वर्गों को विशेष लाभ देने के प्रावधान किए गए हैं, जो सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं.

उनका मानना है कि इन नियमों से आने वाले समय में शैक्षणिक संस्थानों में टकराव, फर्जी शिकायतों और आंतरिक अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है. इससे सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

 सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल
इस्तीफा देने से कुछ घंटे पहले अलंकार अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर एक तीखी और विवादास्पद पोस्ट साझा की थी. इस पोस्ट में उन्होंने यूजीसी के फैसले को “काला कानून” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी. साथ ही उन्होंने “बॉयकॉट बीजेपी” जैसे राजनीतिक नारों का भी इस्तेमाल किया. यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और इसके तुरंत बाद उनके इस्तीफे की खबर सामने आने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया.

सख्त अधिकारी की छवि वाले अलंकार अग्रिहोत्री 
अब तक एक सख्त और अनुशासित अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले अलंकार अग्निहोत्री का इस तरह खुलकर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ बोलना कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा. प्रशासनिक हलकों में इसे एक असाधारण घटनाक्रम माना जा रहा है, जिसने शासन को भी सतर्क कर दिया है.

दो घटनाओं ने बदला फैसला
अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि बीते एक सप्ताह में हुई ये दो घटनाएं माघ मेले में बटुक ब्राह्मणों के साथ व्यवहार और यूजीसी के नए नियम उनके लिए असहनीय थीं. उन्होंने इन्हें समाज के आत्मसम्मान और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जोड़ते हुए अपने पद से अलग होने का फैसला लिया.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag