अर्जुन टैंकों से लेकर ब्रह्मोस मिसाइलों तक...कर्तव्य पथ पर दिखा भारतीय सैन्य शक्ति का शौर्य प्रदर्शन

77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने कर्तव्य पथ पर सैन्य शक्ति और स्वदेशी तकनीक का भव्य प्रदर्शन किया. राफेल, ब्रह्मोस, टैंक और हाइपरसोनिक मिसाइलों ने भारत की निर्णायक और आधुनिक रक्षा क्षमता को उजागर किया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में भारत ने अपनी सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया. कर्तव्य पथ पर जैसे ही राफेल और सुखोई लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंजी, पूरे लोगों में राष्ट्रीय गौरव की अनुभूति फैल गई. ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े हेलीकॉप्टरों के सटीक और अनुशासित फॉर्मेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल रक्षा नहीं, बल्कि निर्णायक क्षमता वाला राष्ट्र बन चुका है.

इस वर्ष गणतंत्र दिवस की थीम ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर आधारित रही. तीस भव्य झांकियों के माध्यम से देश की आज़ादी की भावना और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया.

वायुसेना का दमदार फ्लाईपास्ट

भारतीय वायुसेना ने लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर विमानों के संयुक्त फ्लाईपास्ट से समारोह को नई ऊंचाई दी. आकाश में बनी सटीक आकृतियों ने न केवल तकनीकी उत्कृष्टता दिखाई, बल्कि वायुसेना की परिचालन तैयारियों का भी संदेश दिया. यह प्रदर्शन भारत की बहुस्तरीय हवाई शक्ति को दर्शाने वाला था.

अत्याधुनिक हथियारों ने खींचा ध्यान

परेड में भारत के आधुनिक शस्त्रागार की झलक भी देखने को मिली. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, राफेल और सुखोई लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल प्रणाली और ड्रोन-रोधी हथियार प्रमुख आकर्षण रहे. इन प्रणालियों को ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा गया कि भारत किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

स्वदेशी तकनीक की पहचान बना एचएमआरवी

भारतीय सेना द्वारा प्रदर्शित उच्च गतिशीलता टोही वाहन (HMRV) ने दर्शकों का खास ध्यान खींचा. यह भारत का पहला स्वदेशी बख्तरबंद हल्का विशेष वाहन है, जिसे महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है. यह वाहन युद्धक्षेत्र निगरानी रडार, ड्रोन सपोर्ट, उन्नत संचार प्रणाली और ड्रोन-रोधी हथियारों से लैस है, जिससे यह आधुनिक युद्ध के लिए बेहद उपयोगी बनता है.

टैंकों और विशेष बलों की दमदार मौजूदगी

जमीनी शक्ति खंड में टी-90 भीष्म और अर्जुन एमके-1 मुख्य युद्धक टैंकों ने अपनी ताकत दिखाई. नाग मिसाइल सिस्टम ट्रैक्ड एमके-2 भी इस प्रदर्शन का हिस्सा रहा. वहीं, विशेष बलों के वाहनों अजयकेतु, रंध्वज और ध्वजांक ने तेज और लचीली सैन्य तैनाती की भारत की रणनीति को उजागर किया.

तोपखाने में नई छलांग

दिव्यास्त्र और शक्तिबान जैसी उन्नत प्रणालियों ने आधुनिक निगरानी और तोपखाने क्षमताओं का प्रदर्शन किया. झुंड ड्रोन तकनीक, बंधे हुए ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी हाइब्रिड यूएवी ने यह दिखाया कि भारत युद्ध के भविष्य की तैयारी कर चुका है.

हाइपरसोनिक मिसाइल बनी आकर्षण का केंद्र

डीआरडीओ द्वारा विकसित लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR ASHM) समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही. यह मिसाइल अत्यधिक गति और सटीकता के साथ स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है. इसकी क्षमता भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिनके पास हाइपरसोनिक हथियार तकनीक है.

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