इंदौर में फिर दूषित पानी का कहर, 22 लोग बीमार, प्रशासन में हड़कंप

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल एक बार फिर लोगों की सेहत पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. महू क्षेत्र में गंदा पानी पीने से कम से कम 22 लोग बीमार हो गए हैं, जिनमें कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हालात को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बार फिर दूषित पेयजल लोगों की सेहत पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ताजा मामलों में गंदा पानी पीने से कम से कम 22 लोग बीमार हो गए हैं, जिससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ ही सप्ताह पहले जलजनित बीमारियों से कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं.

शहर में नए मामलों की बढ़ती संख्या ने एक बार फिर पेयजल की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन ने हालात को देखते हुए तत्काल कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य टीमें तैनात कर दी गई हैं.

महू क्षेत्र से सामने आए ज्यादातर मामले

हाल के सभी मामले मुख्य रूप से इंदौर के महू क्षेत्र से सामने आए हैं. दूषित पानी के सेवन के बाद 22 स्थानीय निवासियों ने बीमारी की शिकायत की. इनमें से नौ मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का इलाज घर पर ही चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है.

बीमारों की संख्या बढ़ने की आशंका

अधिकारियों के अनुसार, बीमार लोगों की संख्या 25 से अधिक हो सकती है. आसपास के इलाकों से भी नए मामलों की जानकारी मिल रही है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि संक्रमण और फैल सकता है.

कलेक्टर ने किया अस्पताल का दौरा

प्रभावित इलाकों से खबरें मिलते ही प्रशासन ने गुरुवार देर रात कार्रवाई शुरू कर दी. जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों से मुलाकात की और राहत एवं उपचार कार्यों की समीक्षा की. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तुरंत क्षेत्र में तैनात किया गया.

स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर तैनात

अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की एक टीम शुक्रवार सुबह से ही प्रभावित इलाकों में मौजूद है. टीमें मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही हैं और पूरे हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि स्थिति और न बिगड़े.

नए मामलों की पहचान के लिए सर्वे शुरू

नए मरीजों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने शनिवार सुबह प्रभावित इलाकों में विशेष सर्वे शुरू किया है. इस सर्वे का उद्देश्य नए मामलों की जल्द पहचान करना और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर मरीजों को चिन्हित कर उचित उपचार उपलब्ध कराना है.

पहले भी जा चुकी हैं कई जानें

इस महीने की शुरुआत में इंदौर में गंभीर जल प्रदूषण और जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे. उस दौरान कई लोग बीमार पड़े थे और कई की मौत हो गई थी. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या कम से कम 15 है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि उल्टी और दस्त के कारण करीब 25 लोगों की जान गई थी.

मामला पहुंचा हाईकोर्ट, समिति पर उठे सवाल

पेयजल प्रदूषण के कारणों की जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था. यह मामला पहले ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है.
हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि यह समिति केवल एक औपचारिकता थी और इसका उद्देश्य कथित तौर पर जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को बचाना था.

जांच में ई.कोलाई की पुष्टि

सरकार के आकलन के अनुसार, पेयजल में जीवाणु संक्रमण की वजह से बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला. सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में उच्च न्यायालय को जानकारी दी कि भागीरथपुरा क्षेत्र के 51 ट्यूबवेलों में दूषित पानी पाया गया है. जांच रिपोर्ट में ई.कोलाई जीवाणु की मौजूदगी की पुष्टि हुई है.

प्रभावित परिवारों को मुआवजा

स्थानीय प्रशासन ने इस पूरे मामले में अब तक प्रभावित 21 लोगों के परिवारों को प्रति परिवार 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया है. प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जाएंगे.

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