Delhi MCD ByElection 2025 : दिल्ली नगर निगम उपचुनाव के लिए मतदान जारी, 12 वार्डों में AAP-BJP की सीधी टक्कर
दिल्ली में 12 नगर निगम वार्डों के लिए उपचुनाव आज हो रहे हैं, जिनमें भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला है. ये सीटें उन पार्षदों के इस्तीफे से खाली हुई थीं जो विधानसभा या लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. मतदान शांतिपूर्वक जारी है और मतगणना 3 दिसंबर को होगी.

नई दिल्ली : दिल्ली में आज शहरवासी स्थानीय शासन व्यवस्था की दिशा तय करने जा रहे हैं. 12 नगर निगम सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं, जिनके लिए पहले ही निर्वाचन आयोग ने तारीखें तय कर दी थीं. 3 नवंबर को नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और लंबे इंतजार के बाद आज 30 नवंबर मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपना वोट डाल रहे हैं. इसके बाद मतगणना 3 दिसंबर को होगी.
रिक्त हुए पार्षद पद, बन रहा है नया मुकाम
कहां-कहां हो रहा मतदान
उपचुनाव के दायरे में शामिल 12 वार्ड निम्न हैं मुंडका, शालीमार बाग, अशोक विहार, चांदनी चौक, चांदनी महल, द्वारका, दिचाऊं कलां, नारायणा, संगम विहार, दक्षिण पुरी, ग्रेटर कैलाश और विनोद नगर. इन वार्डों की विविध सामाजिक-भौगोलिक पृष्ठभूमि है; कुछ पुराने औपनिवेशिक और व्यस्त व्यापारिक इलाके हैं, जबकि कुछ आधुनिक आवासीय और उपनगरीय क्षेत्र.
मुकाबला: प्रमुख पार्टियाँ जोर आज़मा रही
इस उपचुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से Bharatiya Janata Party (भाजपा) और Aam Aadmi Party (आप) के बीच है. राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि इन 12 सीटों पर जीत किस दल की होगी, इससे आने वाले सालों में नगर-निगम के सत्ता संतुलन का अंदाज़ा हो जाएगा. शालीमार बाग-बी जैसे संवेदनशील वार्ड में विपक्षी दावेदार भी मैदान में उतरे हैं, इसलिए मुकाबला कड़ा है.
मतदाता, माहौल और चुनावी उत्साह
चुनाव आयोग और प्रशासन ने मतदान हेतु आवश्यक इंतज़ाम पूरे किए हैं. मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ देखी जा रही है. कई नागरिकों ने स्थानीय विकास, सफाई, सुरक्षा तथा पारदर्शी शासन को लेकर अपनी चिंता जताई है और उम्मीद है कि नया निर्वाचित पार्षद इन मुद्दों पर सक्रियता दिखाएगा.
3 दिसंबर को होगी मतगणना
आज मतदान संपन्न होगा, लेकिन असली कहानी तब सामने आएगी जब 3 दिसंबर को मतगणना होगी. यह परिणाम न सिर्फ उन 12 वार्डों की राजनीतिजन्य तस्वीर बदलेंगे, बल्कि पूरे नगर निगम में शक्ति संतुलन पर असर डाल सकते हैं.
यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थानीय शासन और सीधे जनप्रतिनिधित्व का आधार है. आम आदमी या भाजपा जो भी जीत हासिल करे दिल्लीवासियों की यह उम्मीद होगी कि उनका चुना हुआ पार्षद जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहेगा, और नगर-विकास, सफाई, जल-प्रदाय, अव्यवस्था तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाएगा.


