इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा...इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों पर राहुल गांधी ने साधा सरकार पर निशाना
इंदौर में दूषित पेयजल से फैले डायरिया ने कम से कम दस लोगों की जान ले ली. राहुल गांधी ने प्रशासनिक लापरवाही पर भाजपा सरकार को घेरा, जबकि हाईकोर्ट, विपक्ष और भाजपा नेताओं ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की है.

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश के इंदौर में पेयजल के दूषित होने से फैले गंभीर स्वास्थ्य संकट ने पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है. डायरिया के प्रकोप में पांच महीने के एक मासूम समेत कम से कम दस लोगों की मौत के बाद विपक्ष ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही के चलते लोगों के घरों तक 'जहर' पहुंचाया गया.
राहुल गांधी का भाजपा सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इंदौर में लोगों को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोते रहे. उन्होंने कहा कि लंबे समय से स्थानीय लोग बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. राहुल गांधी ने सवाल किया कि आखिर सीवेज पीने के पानी की पाइपलाइन में कैसे मिला और जब खतरे के संकेत साफ थे तो सप्लाई क्यों नहीं रोकी गई.
उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि नागरिकों का मूल अधिकार है. राहुल ने “डबल इंजन सरकार” पर इस अधिकार को कुचलने का आरोप लगाया और कहा कि जब गरीब और कमजोर लोग मरते हैं तो केंद्र सरकार की चुप्पी चिंता पैदा करती है.
इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 2, 2026
घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं - और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया।
लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की - फिर भी…
मौतों के आंकड़ों को लेकर विरोधाभास
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया के कारण दस मौतों की जानकारी मिली है. हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि मरने वालों की संख्या इससे अधिक, करीब 14 तक हो सकती है, जिनमें एक छह महीने का बच्चा भी शामिल है. स्वास्थ्य विभाग फिलहाल दस मौतों की ही पुष्टि कर रहा है, जिससे आंकड़ों को लेकर असमंजस बना हुआ है.
स्वास्थ्य संकट की भयावह तस्वीर
प्रभावित इलाकों से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में शोक में डूबे परिवार दिखाई दे रहे हैं. कई घरों में एक साथ कई लोग बीमार पड़े हैं. बीते नौ दिनों में 1,400 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त की शिकायत के साथ सामने आए हैं. इनमें से 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 32 की हालत इतनी गंभीर है कि उन्हें आईसीयू में रखा गया है.
नगर निगम और प्रशासन की सफाई
इंदौर नगर निगम ने कहा है कि हालात पर काबू पाने के लिए आपात कदम उठाए जा रहे हैं. अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया के मुताबिक, पाइपलाइन में रिसाव के कारण पानी दूषित हुआ. जांच में 50 में से 26 नमूनों में संदूषण पाया गया है. निगम ने प्रभावित इलाकों में टैंकरों से पानी की सप्लाई शुरू की है और लोगों से पानी उबालकर पीने की अपील की है.
पाइपलाइन में कैसे मिला सीवेज?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसनी ने बताया कि प्रयोगशाला जांच से स्पष्ट हुआ है कि मुख्य जल आपूर्ति लाइन में रिसाव के कारण सीवेज मिला. यह रिसाव भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पाया गया, जहां शौचालय के निर्माण से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी.
हाईकोर्ट और नेताओं की प्रतिक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इस पर सुनवाई शुरू कर दी है. वहीं शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी घटना को शर्मनाक बताया है. उमा भारती ने कहा कि मुआवजा काफी नहीं है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए.


