पहले जज कम बोलते थे पर आज कल...रोहिंग्या मामले में CJI की बात पर बोले TMC सांसद कल्याण बनर्जी

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को रोहिंग्या मामले में सुनावई के दौरान CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने पूछा कि क्या घुसपैठियों के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाना चाहिए जबकि अपने देश के नागरिक गरीबी से जूझ रहे हैं. CJI के ब्यान पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या अवैध प्रवासी मामले की सुनवाई के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की टिप्पणी पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने न्यायपालिका की कामकाज शैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जज कम बोलते थे और केवल फैसले देते थे, लेकिन आजकल जज अनावश्यक टिप्पणियाँ कर रहे हैं, जिससे न्यायिक गरिमा पर असर पड़ता है. उनकी इस टिप्पणी से राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

“जज कम बोलें और फैसला अधिक दें”

कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे मुख्य न्यायाधीश के बारे में सीधे टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन सिद्धांत रूप से उनका मानना है कि अदालतों को टिप्पणी देने के बजाय फैसलों पर ध्यान देना चाहिए. उनके शब्दों में “पहले न्यायपालिका में जज कम बात करते थे और अपना फैसला बोलते थे. आजकल कई जज अधिक बोलते हैं, मानो टीआरपी बढ़ाने की कोशिश हो रही हो.” बनर्जी की यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट के उस बयान के संदर्भ में थी, जिसमें CJI ने कहा था कि अवैध रूप से घुसे लोगों के लिए “रेड कार्पेट” नहीं बिछाया जा सकता और देश के गरीब नागरिकों का हक पहले है.

TMC ने किया न्यायपालिका का अपमान 
भाजपा ने टीएमसी सांसद की टिप्पणी को न्यायपालिका का अपमान बताया और ममता बनर्जी सरकार पर गम्भीर आरोप लगाए. भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि टीएमसी हमेशा “वोट बैंक की राजनीति” में लिप्त रही है, और अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर भी हमला कर रही है क्योंकि वह रोहिंग्या मुद्दे पर लंबे समय से राजनीतिक लाभ उठाती रही है. पूनावाला ने यह भी याद दिलाया कि कल्याण बनर्जी पहले भी संवैधानिक पदों का मजाक उड़ा चुके हैं, जैसे उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति की नकल उतारने वाला विवादित बयान दिया था. भाजपा ने कहा कि यह मानसिकता लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपमानजनक है और जनता इसे देख रही है.

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी 
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रोहिंग्या अवैध प्रवासियों से जुड़े एक हैबियस कॉर्पस मामले में सख्त टिप्पणी की. न्यायालय ने पूछा कि क्या भारत को अपने संसाधनों का बोझ ऐसे लोगों पर डाल देना चाहिए, जिन्होंने गैरकानूनी तरीके से सीमा पार की और अब भोजन, आश्रय और सुविधाओं का अधिकार मांग रहे हैं? CJI सूर्य कांत ने साफ कहा कि भारत का कानून अपने नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता देता है, और अवैध घुसपैठियों को अधिकार देने की अपेक्षा उचित नहीं है. अदालत ने मामले की सुनवाई 16 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी.

राजनीतिक बहस का नया दौर
कल्याण बनर्जी की टिप्पणी ने न सिर्फ न्यायपालिका की गरिमा पर चर्चा छेड़ी है, बल्कि रोहिंग्या मुद्दे पर पुराने राजनीतिक मतभेदों को भी सतह पर ला दिया है. भाजपा इसे TMC की “वोट बैंक राजनीति” से जोड़ रही है, जबकि टीएमसी का कहना है कि न्यायपालिका को संवेदनशील मामलों पर कम बयान देने चाहिए. यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक गर्मी ला सकता है, क्योंकि मामला न्यायपालिका से लेकर संसद तक बहस का विषय बन गया है.

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