सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोजशाला परिसर में आज एक साथ होगी सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज

लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, आज बसंत पंचमी के मौके पर मध्य प्रदेश के भोजशाला परिसर में सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज अदा की जाएगी. प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: बसंत पंचमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में आज एक साथ सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज अदा की जाएगी. लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद के बीच यह आयोजन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हो रहा है, जिसके मद्देनज़र प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है.

प्रशासन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के लिए भोजशाला परिसर में चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है. बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के कारण कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है.

सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज के लिए अलग-अलग स्थान तय

भोजशाला मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रशासन भोजशाला परिसर में मां सरस्वती की पूजा और जुमे की नमाज के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित करेगा. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि पूजा और नमाज में शामिल होने वाले लोगों के लिए विशेष पास की व्यवस्था की जाएगी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके.

बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने से बढ़ी संवेदनशीलता

इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार को पड़ने के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने 2 जनवरी को याचिका दायर की थी. इसके बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई का अनुरोध किया गया, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज दोनों की अनुमति दे दी.

6,461 पुलिसकर्मियों की तैनाती, चाक-चौबंद सुरक्षा

आज भोजशाला परिसर में होने वाले आयोजनों के लिए धार जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं. कुल 6,461 पुलिस अधिकारी और जवान तैनात किए गए हैं. इनमें 13 एसपी रैंक के अधिकारी, 25 एएसपी और 67 डीएसपी/सीएसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं. इसके अलावा 933 महिला पुलिसकर्मी और 8 RAF प्लाटून भी सुरक्षा मोर्चे पर तैनात हैं.

एआई ड्रोन और 3D मैपिंग से निगरानी

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए शहर की 3D मैपिंग पूरी कर ली गई है. पुलिस कंट्रोल रूम से छतों, संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की लाइव निगरानी की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 20 से अधिक एआई ड्रोन पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखेंगे. साथ ही 1,500 से 2,000 अतिरिक्त जवानों को रिजर्व में रखा गया है.

भोजशाला का इतिहास 

  • वर्ष 1034 में राजा भोज ने भोजशाला का निर्माण कराया.
  • 1456 में महमूद खिलजी ने भोजशाला को ढहाकर मकबरा बनवाया.
  • 1902 में हुए सर्वे में भोजशाला में हिंदू चिन्ह और संस्कृत शब्द पाए गए, जिसके बाद लॉर्ड कर्जन ने इसके रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये मंजूर किए.
  • 1933 में राजा आनंद राव की तबीयत बिगड़ने पर मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी गई.
  • 1951 में भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया.
  • 1997 में आम नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया.
  • 2003 में हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा तथा मुस्लिम समाज को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की इजाजत दी गई.

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