तरनतारन से पंजाब का विकास सफर शुरू! CM मान ने 19,000 किलोमीटर सड़कों से गाँवों को दिया ‘विकास का हाईवे’

Punjab road project 2025 : मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने तरनतारन से 19,491 किमी ग्रामीण लिंक सड़कों की मरम्मत और निर्माण योजना शुरू की है, जिसकी लागत 4,150 करोड़ रुपये है. यह योजना गांवों को शहरों से जोड़ने, किसानों को लाभ देने, रोजगार बढ़ाने और पारदर्शी तकनीकी प्रक्रिया को अपनाने की मिसाल है. यह परियोजना पंजाब के ग्रामीण विकास में एक ऐतिहासिक बदलाव लाने की दिशा में अग्रसर है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Punjab road project 2025 : पंजाब अब केवल एक भौगोलिक राज्य नहीं, बल्कि विकास, पारदर्शिता और भरोसे का प्रतीक बनता जा रहा है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुशासन का लाभ केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव सीधे गांव की गलियों, खेतों और आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखना चाहिए.

तरनतारन से शुरू हुई परिवर्तन की राह

इस सोच को जमीनी स्तर पर उतारते हुए राज्य सरकार ने तरनतारन से 19,491 किलोमीटर लंबी ग्रामीण लिंक सड़कों के निर्माण और मरम्मत की एक विशाल परियोजना की शुरुआत की है. यह महज सड़कों की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन के सामाजिक-आर्थिक उत्थान का आधार बन रही है. करीब 4,150.42 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही इस परियोजना में न केवल सड़कें बनाई जाएँगी, बल्कि आगामी पांच वर्षों तक उनकी देखभाल भी सुनिश्चित की जाएगी.

मुख्यमंत्री मान ने इस पहल को "हर नागरिक की जिंदगी में सुविधा और खुशहाली की गारंटी" करार दिया और दोहराया कि यह केवल विकास नहीं, बल्कि उनकी सरकार की विश्वसनीयता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है.

आधुनिक तकनीक से पारदर्शी और कुशल काम

इस परियोजना की एक और विशेषता इसका तकनीक-समर्थित कार्यान्वयन है. सड़क निर्माण मंत ई-टेंडरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्वेक्षण का इस्तेमाल किया गया है, जिससे न केवल पारदर्शिता बनी रही, बल्कि 383.53 करोड़ रुपये की बचत भी हुई. यह साबित करता है कि सही इरादों के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश जनता के हित में कैसे किया जा सकता है.

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ
इस मजबूत सड़कीय नेटवर्क से किसानों को मंडियों तक अपनी फसलें तेज़ और सुरक्षित पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे उन्हें बेहतर दाम और समय की बचत मिलेगी. इसके अतिरिक्त, बाढ़ से प्रभावित किसानों को 20,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा देकर सरकार ने अपनी संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दिया है. यह मुआवज़ा देश में सबसे अधिक है और सरकार की किसान-हितैषी नीति को दर्शाता है.

सुरक्षा और सुविधा दोनों को मिली प्राथमिकता
परियोजना में सड़क सुरक्षा को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है. स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के पास ज़ेब्रा क्रॉसिंग, धुंध से बचने के लिए सफेद किनारी पट्टियाँ, और हर दो किलोमीटर पर सूचना संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे. इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि लोगों को दिशा-निर्देशों की स्पष्ट जानकारी भी मिलेगी.

गांवों के लिए नए रोजगार और औद्योगिक संभावनाएं
यह योजना केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांवों को शहरों से जोड़ने वाली आर्थिक धुरी भी बन रही है. सड़कों की मजबूती से व्यापार और औद्योगिक गतिविधियां गांवों के करीब आएंगी, जिससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और शहरी पलायन की प्रवृत्ति कम होगी.

विपक्ष पर हमला, भ्रष्टाचार और नशाखोरी पर नियंत्रण
मुख्यमंत्री मान ने इस मौके पर विपक्षी दलों की आलोचना भी की. उन्होंने कहा कि पारंपरिक पार्टियां केवल जलन और ईर्ष्या से ग्रसित होकर काम कर रही हैं. उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि नशे के सौदागरों को जेल में डाला गया है, जिससे युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालने में सफलता मिली है.

सड़कों का आंकड़ा और राज्यव्यापी कवरेज
वर्तमान में पंजाब में कुल 30,237 लिंक सड़कों की लंबाई 64,878 किलोमीटर है. इनमें से 33,492 किलोमीटर पंजाब मंडी बोर्ड और 31,386 किलोमीटर लोक निर्माण विभाग के अधीन आती हैं. इस परियोजना के तहत 7,373 लिंक सड़कों की मरम्मत और उन्नयन किया जाएगा, जिससे राज्यभर के गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी.

विकास की दिशा में मजबूत कदम
यह परियोजना आने वाले उपचुनावों में भी सरकार की नीयत और नीति का प्रतीक बनेगी. गांवों में तेज़ और सुरक्षित पहुँच, छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा संसाधन, और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सुगम आवागमन अब एक हकीकत बनता जा रहा है. मुख्यमंत्री मान की यह पहल दिखाती है कि पंजाब अब केवल नारे नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले विकास की राह पर अग्रसर है.

भगवंत मान सरकार की यह सड़क परियोजना सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और ग्रामीण उत्थान का प्रतीक बन चुकी है. यह योजना बताती है कि जब इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो विकास हर दरवाज़े तक पहुंच सकता है – चाहे वो खेत की मेड़ हो या गांव की चौपाल.

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