बढ़ सकती हैं रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की मुश्किलें, सीएम धामी तक पहुंचा मामला, अल्मोड़ा में दिया था महिला विरोधी बयान
उत्तराखंड मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के बिहार की महिलाओं पर बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया. माफी के बावजूद विरोध जारी है, कांग्रेस ने प्रदर्शन किया और बिहार महिला आयोग ने मुख्यमंत्री धामी से कार्रवाई की मांग की.

देहरादूनः उत्तराखंड सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की महिलाओं को लेकर दिए गए बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है. यह मामला अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. बयान को लेकर चौतरफा आलोचना हो रही है और विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. भले ही गिरधारी लाल साहू ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली हो, लेकिन इसके बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा.
अल्मोड़ा के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला 23 दिसंबर का है, जब अल्मोड़ा में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान गिरधारी लाल साहू ने बिहार की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी. इस बयान की वीडियो क्लिप सामने आने के बाद इसकी गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली और बिहार तक सुनाई देने लगी. समाज के हर वर्ग ने इस बयान की कड़ी निंदा की है. भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों तक, सभी ने इसे अस्वीकार्य बताया और साहू के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई.
माफी के बावजूद नहीं थमी नाराजगी
बढ़ते विरोध के बीच गिरधारी लाल साहू ने एक और वीडियो जारी कर सफाई दी. उन्होंने दावा किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उनका आशय वैसा नहीं था जैसा समझा गया. इसके साथ ही उन्होंने माफी भी मांगी. हालांकि, उनकी सफाई और माफी से लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ. कई संगठनों और राजनीतिक दलों का कहना है कि इस तरह की भाषा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हो सकती.
कांग्रेस का प्रदर्शन
इस विवाद को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने शुक्रवार को मंत्री रेखा आर्या के आवास के बाहर प्रदर्शन किया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री से सार्वजनिक रूप से जवाब देने और अपने पति के बयान पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की. हालांकि, उस समय न तो रेखा आर्या और न ही उनके पति उत्तराखंड में मौजूद थे. अब तक मंत्री की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे विपक्ष को और हमलावर होने का मौका मिला है.
बिहार महिला आयोग ने सीएम धामी को लिखा पत्र
मामला तूल पकड़ता देख बिहार सरकार भी सक्रिय हो गई है. बिहार महिला आयोग ने सीधे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बिहार की महिलाओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बेहद निंदनीय है. पत्र में यह भी कहा गया है कि इस बयान से बिहार की महिलाओं की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचा है, इसलिए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए.
भाजपा ने बनाई दूरी
इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने गिरधारी लाल साहू से दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. प्रदेश भाजपा प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि साहू भाजपा के सदस्य नहीं हैं और पार्टी इस तरह के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करती है. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और कानून के तहत जो भी प्रावधान हैं, उसी के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
आगे क्या होगा?
बिहार महिला आयोग के पत्र और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अगले कदम पर टिकी है. यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है या नहीं.


