सरकार का बड़ा प्लान: उम्र के हिसाब से तय होगा सोशल मीडिया एक्सेस, जल्द आ सकता है नया नियम
सरकार बच्चों और माइनर्स को सोशल मीडिया के नुकसान से बचाने के लिए नया प्लान बना रही है. पूरी तरह बैन करने की जगह उम्र के हिसाब से पाबंदियां, पेरेंटल कंट्रोल, स्क्रीन टाइम लिमिट और प्लेटफॉर्म्स की ज्यादा जिम्मेदारी जैसे आसान और प्रभावी उपायों पर विचार चल रहा है.

केंद्र सरकार बच्चों और माइनर्स के सोशल मीडिया उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की बजाय उम्र के आधार पर नियंत्रित करने का नया प्लान तैयार कर रही है. पूरी तरह बैन लगाने के स्थान पर बच्चों की उम्र के हिसाब से अलग-अलग स्तर की अनुमति देने का विचार किया जा रहा है. सरकार उद्योग जगत और विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा कर रही है. इसमें पेरेंटल कंट्रोल, स्क्रीन टाइम की सीमा, कुछ फीचर्स पर रोक और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं. अभी उम्र की सीमा को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
उम्र सीमा पर विचार
चर्चाओं में मुख्य रूप से दो विकल्पों पर बात हो रही है — 13 साल से कम उम्र के बच्चों और 16 साल या उससे अधिक उम्र के किशोरों के लिए अलग-अलग नियम बनाने का. सरकार का मानना है कि मौजूदा सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि बच्चे आसानी से झूठी उम्र डालकर अकाउंट बना लेते हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौती
ग्रामीण इलाकों और कम आय वाले परिवारों में एक ही मोबाइल फोन पूरे परिवार के बीच शेयर होता है, जिससे उम्र की सही जांच करना बेहद मुश्किल है. अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि वर्तमान सेफगार्ड्स बच्चों को ऑनलाइन खतरों से पूरी तरह नहीं बचा पा रहे हैं.
सरकार का मुख्य फोकस
सरकार का मुख्य फोकस बच्चों को ऑनलाइन गलत सामग्री, साइबर खतरे और अनुचित प्रभाव से बचाने पर है. पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बजाय संतुलित रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है. इसमें माता-पिता को ज्यादा नियंत्रण देने, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार बनाने और यूजर्स की उम्र की सही जांच के बेहतर तरीके विकसित करने पर जोर है.
नया नियम लागू करने में चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उम्र सीमा 16 या 18 साल तय की गई तो प्लेटफॉर्म्स को अपनी नीतियां बदलनी होंगी. इससे प्राइवेसी के मुद्दे भी उठ सकते हैं और कुछ बच्चों का डिजिटल एक्सेस प्रभावित हो सकता है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां एक ही डिवाइस पूरे परिवार के पास होता है, वहां नियमों को लागू करना बड़ी चुनौती होगी.
आगे का रास्ता
सरकार अभी कई मॉडल पर विचार कर रही है, जिसमें उम्र के आधार पर अलग-अलग स्तर की पाबंदियां लगाई जा सकती हैं. यह बदलाव आईटी नियमों में संशोधन करके लागू किया जा सकता है. सरकार बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ प्राइवेसी, लागू करने की व्यवहारिक दिक्कतों और डिजिटल एक्सेस को अनावश्यक रूप से सीमित न करने का भी पूरा ध्यान रख रही है. अंतिम फैसला सभी पक्षों की राय सुनने के बाद ही लिया जाएगा.


