भूल जाइए पुराना पासपोर्ट! भारत ने जारी किया नया e-Passpot...जानें क्या है इसकी खासियत

भारत ने नेक्स्ट-जेनरेशन ई-पासपोर्ट (e-passport) लॉन्च किया है, जिसमें RFID चिप्स, एन्क्रिप्टेड बायोमेट्रिक डेटा, इंटरलॉकिंग माइक्रोलेटर्स और फेस/फिंगरप्रिंट रिकॉग्निशन जैसी अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकें हैं. Passport Seva 2.0 AI-Driven सेवा, DigiLocker, Aadhaar, PAN इंटीग्रेशन सहित सुविधाएं प्रदान करती है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : भारत ने अपने पासपोर्ट सिस्टम में एक बड़ी तकनीकी उन्नति की है और अब अगले स्तर के ई-पासपोर्ट (e-passport) जारी करने की योजना है. इन पासपोर्ट में अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल हैं, जैसे इंटरलॉकिंग माइक्रोलेटर्स, रिलीफ टिंट, और एम्बेडेड आरएफआईडी (RFID) चिप्स, जो एन्क्रिप्टेड बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रूप से संग्रहित करते हैं. इस नई प्रणाली के तहत, अब से जारी होने वाले सभी पासपोर्ट ई-पासपोर्ट होंगे, जबकि पुराने गैर-इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट उनकी वैधता समाप्त होने तक मान्य रहेंगे. सरकार का लक्ष्य है कि जून 2035 तक पूरी तरह से ई-पासपोर्ट में संक्रमण हो जाए.

सुरक्षा और तकनीकी फीचर्स

आपको बता दें कि प्रत्येक ई-पासपोर्ट में RFID चिप और एंटीना एम्बेडेड होता है, जो बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत जानकारी जैसे फोटो और फिंगरप्रिंट को सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में संग्रहित करता है, जो ICAO (International Civil Aviation Organisation) मानकों के अनुरूप है. चिप की संपर्क रहित डेटा रीडिंग क्षमता से इमिग्रेशन काउंटर पर पहचान की प्रक्रिया तेज और विश्वसनीय होती है. इस तकनीक के कारण धोखाधड़ी, छेड़छाड़ और पासपोर्ट के सामान्य पहनाव में कमी आती है. अब तक मंत्रालय ने देश में 80 लाख और विदेशों में भारतीय मिशनों के माध्यम से 60,000 से अधिक ई-पासपोर्ट जारी किए हैं.

पासपोर्ट धोखाधड़ी में कमी
वरिष्ठ विदेश मंत्रालय अधिकारियों के अनुसार, नया ई-पासपोर्ट सिस्टम पासपोर्ट धोखाधड़ी को काफी हद तक कम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी व्यक्ति के नाम पर कई पासपोर्ट न हों. नए सिस्टम में आवेदनकर्ता के बायोमेट्रिक डेटा को केंद्रीय सर्वर के साथ मिलाया जाता है, जिससे तुरंत पता चल जाता है कि उस नाम से कोई पहले से पासपोर्ट जारी है या नहीं.

AI-Driven Passport Seva 2.0
मई 2025 में लागू किए गए पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्जन 2.0 (PSP V2.0) ने देश भर में 37 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों (RPOs), 93 पासपोर्ट सेवा केंद्रों (PSKs), और 451 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों (POPSKs) में संचालन शुरू किया. वैश्विक संस्करण GPSP V2.0 अक्टूबर 2025 में भारतीय मिशनों में सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लॉन्च किया गया.

AI-ड्रिवन चैट और वॉइस बॉट्स जैसी सुविधाएं 
इस सिस्टम में AI-ड्रिवन चैट और वॉइस बॉट्स, ऑनलाइन डॉक्यूमेंट अपलोड, ऑटो-फिल्ड फॉर्म, और UPI/QR आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, बायोमेट्रिक और फेस रिकॉग्निशन सिस्टम, AI-आधारित अलर्ट, डेटा एनालिटिक्स, DigiLocker, Aadhaar और PAN के साथ इंटीग्रेशन, RPA, टचस्क्रीन फीडबैक, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर पैड, और रीयल-टाइम MIS डैशबोर्ड जैसी तकनीकें इसे अत्याधुनिक बनाती हैं.

नागरिक सुविधा और पहुंच
राष्ट्रीय कॉल सेंटर 17 भाषाओं में नागरिक सहायता प्रदान करता है. नोएडा, चेन्नई और बैंगलुरु में तीन अत्याधुनिक डेटा सेंटर सुरक्षित और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करते हैं. प्रति वर्ष 1.5 करोड़ से अधिक पासपोर्ट जारी होते हैं, जिससे नागरिकों के लिए सुविधा और गति बढ़ी है. मोबाइल पासपोर्ट सेवा वैनें 37 RPO क्षेत्रों में दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचती हैं. केवल 32 लोकसभा क्षेत्रों में अभी PSK या POPSK नहीं है, और अगले छह महीनों में इन क्षेत्रों में भी सेवा उपलब्ध कराई जाएगी.

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