आपकी निजी WhatsApp चैट्स पढ़ सकता है Meta, क्या झूठा है प्राइवेसी का दावा ? एलन मस्क ने दिया हैरान करने वाला जवाब

अमेरिका में दायर नए मुकदमे ने WhatsApp और Meta के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अंतरराष्ट्रीय यूजर्स ने आरोप लगाया है कि कंपनी मैसेज तक पहुंच रख सकती है. Meta ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. विवाद के बीच एलन मस्क ने WhatsApp की सुरक्षा पर टिप्पणी कर अपने X Chat को बढ़ावा दिया.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे ने एक बार फिर Meta और WhatsApp को यूजर प्राइवेसी के सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है. यह मामला सीधे WhatsApp के उस सबसे बड़े दावे को चुनौती देता है, जिसके तहत कंपनी वर्षों से कहती आ रही है कि उसके प्लेटफॉर्म पर भेजे गए मैसेज पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होते हैं और उन्हें खुद WhatsApp या Meta भी नहीं पढ़ सकता. लेकिन इस मुकदमे में किए गए आरोप इस दावे के बिल्कुल उलट हैं और इसी वजह से यह विवाद तेजी से वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है. 

यूजर्स के साथ धोखाधड़ी कर रही कंपनी 
आपको बता दें कि यह केस अमेरिका की सैन फ्रांसिस्को स्थित एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर किया गया है. वादी पक्ष का आरोप है कि Meta और WhatsApp ने अपने अरबों यूजर्स को यह विश्वास दिलाया कि उनकी निजी बातचीत पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि हकीकत में कंपनी कथित तौर पर मैसेज से जुड़ा डेटा स्टोर करती है, उसका विश्लेषण करती है और कुछ हद तक उस तक पहुंच भी रखती है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि WhatsApp ऐप के भीतर दिखाया जाने वाला वह संदेश, जिसमें दावा किया जाता है कि केवल चैट में शामिल लोग ही बातचीत पढ़ या साझा कर सकते हैं, भ्रामक है. वादियों ने यहां तक आरोप लगाया है कि यह व्यवहार यूजर्स के साथ धोखाधड़ी के बराबर है.


इसमें केवल एक देश के नागरिक शामिल नहीं
इस मुकदमे को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि इसमें केवल एक देश के नागरिक शामिल नहीं हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, इस केस को ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के यूज़र्स ने मिलकर दायर किया है. इस अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर WhatsApp की कार्यप्रणाली को लेकर चिंताएं मौजूद हैं. शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि Meta के कर्मचारी WhatsApp की बातचीत की सामग्री तक पहुंच सकते हैं, जो अगर सच साबित होता है तो एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं की विश्वसनीयता और उनके नियमन पर बड़ा असर डाल सकता है.

कई सवालों के जवाब अभी बाकी
मुकदमे में “व्हिसलब्लोअर्स” का भी जिक्र किया गया है, जिनके जरिए इन कथित प्रथाओं के सामने आने की बात कही जा रही है. हालांकि, अभी तक न तो इन व्हिसलब्लोअर्स की पहचान सार्वजनिक की गई है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि उन्होंने किस तरह की जानकारी उपलब्ध कराई. इस अस्पष्टता के चलते आगे की कानूनी कार्यवाही में सबूतों की मजबूती एक अहम मुद्दा बन सकती है. फिलहाल, व्हिसलब्लोअर्स का उल्लेख मामले को रहस्यमय और चर्चित जरूर बनाता है, लेकिन कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं.

Meta ने मुकदमे को निराधार बताया 
Meta ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुकदमे को पूरी तरह निराधार बताया है. कंपनी का कहना है कि वह इस केस को “फ्रिवोलस” यानी बेबुनियाद मानती है और मुकदमा दायर करने वाले वकीलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर सकती है. Meta के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने साफ शब्दों में कहा है कि यह दावा कि WhatsApp के मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं हैं, पूरी तरह गलत और हास्यास्पद है. उनके अनुसार, WhatsApp पिछले एक दशक से Signal प्रोटोकॉल पर आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहा है और कंपनी खुद यूज़र्स के मैसेज नहीं पढ़ सकती. Meta पहले भी कई बार प्राइवेसी विवादों में यही रुख दोहरा चुका है.

एलन मस्क ने दिया ये जवाब 
इस पूरे विवाद के बीच टेस्ला और X के मालिक एलन मस्क की प्रतिक्रिया ने मामले को एक अलग ही मोड़ दे दिया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मस्क ने WhatsApp की सुरक्षा पर सवाल उठाए और यहां तक कहा कि Signal जैसी सेवाएं भी संदेह के घेरे में हैं. उन्होंने लोगों से अपने प्लेटफॉर्म की मैसेजिंग सेवा X Chat इस्तेमाल करने की अपील की. मस्क की इस टिप्पणी को कई लोगों ने तकनीकी बहस के बजाय व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा, लेकिन इससे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स की सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चा और तेज हो गई.

मुकदमा सिर्फ Meta या WhatsApp तक सीमित नहीं
कुल मिलाकर, यह मुकदमा सिर्फ Meta या WhatsApp तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर में यूज़र प्राइवेसी, भरोसे और टेक कंपनियों की पारदर्शिता जैसे बड़े सवालों को सामने लाता है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत में ये आरोप कितने टिकते हैं और क्या यह मामला मैसेजिंग ऐप्स की दुनिया में किसी बड़े बदलाव की वजह बनता है या नहीं.

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