सोना-चांदी सस्ता होने से लेकर किसान सम्मान निधि बढ़ोतरी तक... आज निर्मला सीतारमण बजट में कर सकती हैं ये बड़े ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना नौवां बजट पेश करने जा रही हैं. ये उनके करियर का एक बड़ा रिकॉर्ड है, आम आदमी को बड़ी उम्मीदें हैं कि इस बार सोना-चांदी सस्ता होगा, इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ेगा और पीएम किसान सम्मान निधि में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो सकती है.आइए देखें बजट में क्या-क्या बड़ा ऐलान हो सकता है.

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने वाली हैं. यह उनके कार्यकाल का नौवां बजट होगा, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं. इस बार बजट में सीमा शुल्क में सुधारों की उम्मीदें जोरों पर हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषण से संकेत मिलता है कि यह बजट सुधारों की दिशा में आगे बढ़ेगा. बाजार और आम जनता की नजरें उन प्रमुख घोषणाओं पर टिकी हैं, जिनसे सोना-चांदी सस्ता हो सकता है, इनकम टैक्स की नई व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है, किसान सम्मान निधि में वृद्धि हो सकती है, साथ ही अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेनों के लिए नए ऐलान संभव हैं.
बजट की इन उम्मीदों के बीच, कई महत्वपूर्ण पहलू ऐसे हैं जिन पर विशेष ध्यान केंद्रित रहेगा. राजकोषीय घाटे से लेकर कैपिटल एक्सपेंडिचर, कर्ज अनुपात, उधार, कर राजस्व, जीएसटी और जीडीपी वृद्धि जैसे मुद्दे बजट की दिशा तय करेंगे. इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, बुनियादी ढांचा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में सुधारों की संभावनाएं भी चर्चा का केंद्र बिंदु हैं.
राजकोषीय घाटा
सरकार के खर्च और आय के बीच का यह अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है. चालू वित्त वर्ष में इसे जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. बजट में 4.5 प्रतिशत से कम का लक्ष्य हासिल करने के बाद, बाजार की नजरें अब इस बात पर हैं कि सरकार कर्ज और जीडीपी अनुपात को कैसे घटाएगी. संभावना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 4 प्रतिशत तय किया जा सकता है.
कैपिटल एक्सपेंडिचर
चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने इस मद में 11.2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है. निजी निवेश में सुस्ती को ध्यान में रखते हुए, अगले बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बनाए रखने की उम्मीद है. इसमें 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि संभव है, जिससे यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है.
लोन डिटेल्स
2024-25 के बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि वित्त वर्ष 2026-27 से सरकार की नीति का उद्देश्य कर्ज को जीडीपी अनुपात में कम करना होगा. बाजार की नजरें इस पर हैं कि सरकार कर्ज-जीडीपी अनुपात को 60 प्रतिशत तक लाने के लिए क्या समय-सीमा तय करती है. वर्ष 2024 में यह अनुपात 85 प्रतिशत था, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 57 प्रतिशत शामिल था.
उधारी
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 14.80 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी का अनुमान रखा है. घाटे की भरपाई के लिए बाजार से लिया जाने वाला यह कर्ज देश की आर्थिक स्थिति और सरकारी आय का संकेत देता है.
टैक्स रेवेन्यू
2025-26 के बजट में कुल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है. इसमें से 25.20 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष करों से और 17.5 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष करों से आने की उम्मीद है.
जीएसटी
वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी से 11.78 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है, जो 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. सितंबर 2025 से जीएसटी दरों में कमी के बाद राजस्व में बढ़ोतरी की संभावना है. इसलिए, 2026-27 के अनुमान पर विशेष फोकस रहेगा.
जीडीपी ग्रोथ
2025-26 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत मानी गई है. मुद्रास्फीति कम रहने के कारण मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है. वित्त वर्ष 2026-27 में यह वृद्धि 10.5 से 11 प्रतिशत के बीच रह सकती है.
अन्य प्रमुख उम्मीदें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषण से यह संकेत मिलता है कि बजट में सुधार एक्सप्रेस जारी रहेगी यानी बजट रिफॉर्म की दिशा में होगा. ऐसे में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सरकारी व्यय बढ़ाने, रक्षा में स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन देने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नई गति प्रदान करने की उम्मीद है. रियल एस्टेट क्षेत्र को भी कम ब्याज दरों, कर राहत और किफायती आवास से जुड़ी घोषणाओं की आशा है, जिससे मांग बढ़ सकती है और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं.


