इकोनॉमिक सर्वे 2025-26: US से ट्रेड डील पर कब लगेगी मुहर? टैरिफ को लेकर राहत, जानिए इकोनॉमिक सर्वे की बड़ी बातें

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. अमेरिका के साथ ट्रेड डील से लेकर जीडीपी ग्रोथ, टैरिफ असर और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश तक, सर्वे में कई अहम बातें सामने आई हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी तस्वीर सामने आई है. अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सर्वे में अहम संकेत दिए गए हैं. सर्वे के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर साल 2026 में अंतिम सहमति बनने की संभावना जताई गई है.

वैश्विक दबाव, अमेरिकी टैरिफ और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार बनी हुई है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि सरकार की सक्रिय नीतियों के चलते टैरिफ का असर निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग पर सीमित रहा है और देश की ग्रोथ स्थिर बनी हुई है.

US से ट्रेड डील पर 2026 में लग सकती है मुहर

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लगातार बातचीत जारी है. हालांकि, इस समझौते पर औपचारिक मुहर 2026 में लगने की उम्मीद जताई गई है. सर्वे के अनुसार, मौजूदा टैरिफ विवादों के बावजूद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में स्थिरता बनी हुई है.

अमेरिकी टैरिफ के बावजूद ग्रोथ पर सीमित असर

सर्वे के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में अमेरिकी टैरिफ, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की आर्थिक गति पर मामूली असर पड़ा है. सरकार द्वारा टैरिफ प्रभाव को कम करने के लिए उठाए गए कदमों से निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सहारा मिला है.

GDP में मजबूती की बड़ी वजह

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के फर्स्ट एडवांस एस्टीमेट के अनुसार, FY26 में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है. इसकी सबसे बड़ी वजह मजबूत घरेलू मांग बताई गई है. इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और बेहतर राजकोषीय अनुशासन से ग्रोथ को स्थायित्व मिला है.सर्वे के अनुसार FY26 में राजकोषीय घाटा 4.8% रहने की संभावना है, जो तय लक्ष्य के भीतर है.

घरेलू मांग बनी विकास की रीढ़

सर्वे में कहा गया है कि ग्रामीण और शहरी मांग के बीच संतुलन बना हुआ है. सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते सरकारी निवेश से रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है.

वैश्विक दबावों के बीच भी मजबूत स्थिति

आर्थिक सर्वे मानता है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम बने हुए हैं, लेकिन मौजूदा हालात भारत के लिए तत्काल किसी बड़े मैक्रो-इकोनॉमिक संकट की ओर इशारा नहीं करते. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर बैंकिंग सिस्टम और नीति विश्वसनीयता भारत के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं.

निर्यात और AI पर सरकार का फोकस

सर्वे के मुताबिक, करंट अकाउंट डेफिसिट के कारण रुपया कुछ हद तक अंडरवैल्यूड है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा नुकसानदेह नहीं है. मुद्रा स्थिरता के लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट, खासकर वैल्यू-एडेड और टेक्नोलॉजी आधारित निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया है.

इसके साथ ही, पहली बार आर्थिक सर्वे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अलग अध्याय शामिल किया गया है, जो आने वाले समय में सरकार के टेक्नोलॉजी फोकस को दर्शाता है.

राज्यों को Capex पर जोर देने की सलाह

आर्थिक सर्वे में राज्यों को कैश ट्रांसफर की बजाय पूंजीगत खर्च (Capex) को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है, ताकि निजी निवेश पर नकारात्मक असर यानी क्राउडिंग आउट का खतरा न बढ़े.

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