GJEPC रिपोर्ट: जेम-ज्वैलरी निर्यात में स्थिरता, लेकिन अमेरिकी बाजार में 44% की गिरावट ने बढ़ाई चिंता
GJEPC के अनुसार अप्रैल-दिसंबर 2025 में भारत का जेम-ज्वैलरी निर्यात लगभग स्थिर रहा, लेकिन अमेरिका को निर्यात में 44% की भारी गिरावट आई. टैरिफ अनिश्चितता और घटती मांग से उद्योग चिंतित है, जबकि UAE और ऑस्ट्रेलिया से राहत मिली है.

नई दिल्ली: जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने भारत के रत्न और आभूषण उद्योग से जुड़े ताजा आंकड़े जारी किए हैं, जो एक तरफ राहत तो दूसरी तरफ चिंता का कारण बनते हैं. परिषद के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 की अवधि में भारत का कुल रत्न और आभूषण निर्यात लगभग स्थिर बना रहा, लेकिन इसी दौरान अमेरिका को होने वाले निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के पहले नौ महीनों में भारत का अनंतिम रत्न और आभूषण निर्यात 20.75 अरब डॉलर रहा. यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मात्र 0.41 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. हालांकि रुपये के लिहाज से देखें तो इसमें 3.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि मूल्य के स्तर पर उद्योग ने किसी हद तक संतुलन बनाए रखा है.
अमेरिका को निर्यात में 44% की बड़ी गिरावट
सबसे ज्यादा चिंता का विषय अमेरिका को होने वाले निर्यात में आई तेज गिरावट है. अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान अमेरिका को निर्यात 44 प्रतिशत घटकर 3.86 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 6.95 अरब डॉलर था. अकेले दिसंबर 2025 में ही अमेरिका को निर्यात में सालाना आधार पर 50.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
जीजेईपीसी के अनुसार, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता और अमेरिका में विवेकाधीन खर्च में कमी इसके प्रमुख कारण हैं. अमेरिका भारत के लिए रत्न और आभूषणों का सबसे बड़ा बाजार है और कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है, ऐसे में यहां आई गिरावट उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरी है.
टैरिफ अनिश्चितता पर उद्योग की चिंता
जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरित भंसाली ने कहा कि अमेरिका को शिपमेंट में आई गिरावट बेहद चिंताजनक है. उन्होंने बताया कि लंबे समय से बनी टैरिफ संबंधी अनिश्चितता भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर नकारात्मक असर डाल सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग को भारत सरकार पर भरोसा है और चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं से सकारात्मक समाधान निकलने की उम्मीद है.
सूरत पर वैश्विक हालात का असर
देश का प्रमुख हीरा प्रसंस्करण केंद्र सूरत भी लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है. वैश्विक स्तर पर बिकने वाले हर दस हीरों में से करीब आठ का प्रसंस्करण सूरत में होता है. इसके बावजूद आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट, मांग में गिरावट और रूसी कच्चे पत्थरों से बने पॉलिश हीरों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने उद्योग को प्रभावित किया है. ये रूसी पत्थर सूरत की कुल आपूर्ति का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा हैं. इसके चलते कई कारखानों में कामकाज धीमा पड़ा है और रोजगार में भी कटौती देखने को मिली है.
जीजेईपीसी ने बताया कि हीरों के निर्यात में आई गिरावट की भरपाई आभूषण निर्यात में हुई बढ़ोतरी से हो गई. सोने, चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों की मांग बेहतर रही, जिससे कटे और पॉलिश किए गए हीरों और लैब में उगाए गए हीरों के कमजोर प्रदर्शन का असर संतुलित हो सका.
वैकल्पिक बाजार बने सहारा
अमेरिका में गिरावट के बावजूद अन्य देशों को निर्यात ने व्यापार को सहारा दिया. संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 6.89 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हांगकांग को निर्यात भी 28 प्रतिशत बढ़कर 4.25 अरब डॉलर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया को निर्यात में करीब 40 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 277.76 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
मुक्त व्यापार समझौतों से उम्मीद
किरित भंसाली ने कहा कि यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते उद्योग के लिए बेहद अहम समय पर आए हैं. इसके अलावा ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और अन्य देशों के साथ हुए या प्रस्तावित समझौते शुल्क कम करने और व्यापार बाधाएं घटाने में मदद करेंगे. उनका कहना है कि इन समझौतों से नए बाजार खुलेंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी.


