रहमान के पक्षपात वाले बयान पर तस्लीमा नसरीन की प्रतिक्रिया, 'नसरीन ने गिनाईं आम लोगों की परेशानियां'

एआर रहमान के बयान के बाद बॉलीवुड में भेदभाव को लेकर बहस छिड़ी, जिस पर तस्लीमा नसरीन ने कहा कि असली भेदभाव आम और कमजोर लोगों को झेलना पड़ता है, न कि मशहूर और सफल सितारों को.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

एआर रहमान के हालिया इंटरव्यू के बाद बॉलीवुड में कथित सांप्रदायिक भेदभाव को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. इसी मुद्दे पर मशहूर लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. रहमान की टिप्पणियों ने सोशल मीडिया पर तीखी चर्चाओं को जन्म दिया, जिसके बाद संगीतकार को अपने बयान पर सफाई भी देनी पड़ी.

विवाद कब शुरू हुआ?

यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ, जब एआर रहमान बीबीसी एशियन नेटवर्क के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. वहां उनसे सवाल किया गया कि क्या तमिल पृष्ठभूमि से होने का असर उनके बॉलीवुड करियर पर पड़ा. इस सवाल के जवाब में रहमान की बातों को कुछ लोगों ने सांप्रदायिक संदर्भ से जोड़ दिया, जिसके बाद ऑनलाइन बहस तेज हो गई. इसी संदर्भ में तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए अपनी राय रखी.

तस्लीमा नसरीन ने लिखा कि प्रसिद्धि, पैसा और सफलता अक्सर लोगों को भेदभाव से बचा लेते हैं. उन्होंने कहा कि एआर रहमान भारत के सबसे लोकप्रिय संगीतकारों में से एक हैं और उनकी फीस भी बेहद ऊंची है. उनके अनुसार, यह कहना कि उन्हें सिर्फ मुस्लिम होने के कारण काम नहीं मिल रहा, पूरी सच्चाई नहीं दर्शाता. नसरीन ने उदाहरण देते हुए शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, जावेद अख्तर और शबाना आज़मी जैसे नामों का जिक्र किया और कहा कि ये सभी मुस्लिम होने के बावजूद इंडस्ट्री में शीर्ष पर हैं.

तस्लीमा नसरीन ने निजी अनुभव किया साझा 

अपने निजी अनुभव साझा करते हुए तस्लीमा नसरीन ने बताया कि असली भेदभाव आम और कमजोर लोगों को झेलना पड़ता है. उन्होंने लिखा कि उनके नाम की वजह से लोग उन्हें मुस्लिम समझ लेते हैं और उन्हें घर किराए पर देने से मना कर देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नास्तिक होने के कारण उन्हें कई जगह हिंसा और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा, यहां तक कि कुछ शहरों में वे कदम भी नहीं रख सकतीं. उनके अनुसार, ये समस्याएं एआर रहमान या बड़े बॉलीवुड सितारों के जीवन से बिल्कुल अलग हैं.

भारत में अपनी स्थिति को लेकर नसरीन ने लिखा कि वे यहां नागरिक नहीं हैं, लेकिन देश से प्रेम करती हैं. उन्होंने कहा कि वे सिद्धांतों और विचारों से कभी समझौता नहीं करतीं, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नास्तिकता को लेकर समाज में अब भी गहरी गलतफहमियां मौजूद हैं.

बयान में तस्लीमा नसरीन ने क्या कहा?

अपने बयान के अंत में तस्लीमा नसरीन ने कहा कि एआर रहमान को सभी धर्मों और विचारधाराओं के लोग समान रूप से सम्मान देते हैं, इसलिए उन पर सहानुभूति दिखाना उचित नहीं है. वहीं, विवाद बढ़ने के बाद एआर रहमान ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कभी किसी भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था. उन्होंने कहा कि संगीत उनके लिए भारत की संस्कृति से जुड़ने और उसका सम्मान करने का माध्यम है और भारत उनके लिए प्रेरणा, गुरु और घर समान है.

अपने मूल इंटरव्यू में रहमान ने यह भी स्वीकार किया था कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी फिल्म उद्योग का माहौल बदला है, हालांकि उन्होंने कभी खुले तौर पर भेदभाव का अनुभव नहीं किया, लेकिन बदलावों को नकारा भी नहीं जा सकता.

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