बंगाल विधानसभा का आखिरी दिन रणभूमि बना, बीजेपी-टीएमसी विधायकों की भिड़ंत और शंकर घोष निलंबन से मचा बवाल

बंगाल विधानसभा का आखिरी दिन मैदान-ए-जंग बन गया। बीजेपी और टीएमसी विधायक आपस में भिड़ गए, हंगामा हुआ और मार्शलों को बीच-बचाव करना पड़ा। इस दौरान बीजेपी के मुख्य सचेतक शंकर घोष को निलंबित कर दिया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

National News: बंगाल विधानसभा के विशेष सत्र के आखिरी दिन पूरा माहौल बिगड़ गया। बीजेपी और टीएमसी विधायक आपस में भिड़ गए और जोरदार नारेबाजी हुई। स्पीकर ने कई बार स्थिति संभालने की कोशिश की लेकिन शोर-शराबा थमने का नाम नहीं ले रहा था। जैसे-जैसे मिनट बीतते गए, माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण होता चला गया। बीजेपी और टीएमसी विधायकों के बीच झगड़ा इतना बढ़ गया कि हाथापाई जैसी स्थिति बन गई। मेजें थपथपाई गईं, जोर-जोर से बहस हुई और माहौल बेहद गर्म हो गया। मार्शलों को बीच में आकर हालात काबू करने पड़े। बीजेपी ने आरोप लगाया कि टीएमसी विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है। यह झगड़ा अब विधानसभा से निकलकर सड़कों तक फैल गया है।

हंगामे में शंकर घोष निलंबित

हंगामे के बीच बीजेपी मुख्य सचेतक शंकर घोष को निलंबित कर दिया गया। स्पीकर ने उन्हें अव्यवस्था फैलाने का जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी नेताओं ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया और कहा कि घोष तो सिर्फ विपक्ष के अधिकारों की रक्षा कर रहे थे। यह कदम विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया जा रहा है। इस निलंबन ने बीजेपी-टीएमसी के बीच दरार और गहरी कर दी है।

ममता सरकार पर बीजेपी का हमला

बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी सरकार पर जोरदार हमला बोला। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इसे लोकतंत्र का काला दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि ममता सरकार विपक्ष की कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं है। बीजेपी ने साफ किया कि उसका संघर्ष विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह जारी रहेगा।

लोकतंत्र की हत्या का आरोप

शुभेंदु अधिकारी का बयान कि "लोकतंत्र की हत्या" कर दी गई, पूरे बंगाल में गूंज उठा। उन्होंने ममता सरकार को तानाशाह करार दिया और कहा कि विधानसभा में विपक्ष को दुश्मन समझा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह बयान वायरल हो गया और चर्चा का विषय बन गया। बीजेपी इसे अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।

टीएमसी बोली बीजेपी का ड्रामा

टीएमसी ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि पूरा हंगामा बीजेपी ने खुद सुर्खियां बटोरने के लिए किया। पार्टी नेताओं का कहना था कि शंकर घोष ने अनुशासन तोड़ा और निलंबन बिल्कुल सही था। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के बयान को राजनीतिक ड्रामा बताया। टीएमसी ने कहा कि बीजेपी का असली मकसद विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करना था।

विधानसभा टकराव से सियासी तूफान

विधानसभा की इस भिड़ंत ने बंगाल की राजनीति में और आग लगा दी है। बीजेपी अपने समर्थकों को ममता सरकार की कथित तानाशाही दिखा रही है। वहीं टीएमसी बीजेपी को गैर-जिम्मेदार ठहरा रही है। विधानसभा का यह हंगामा अब बंगाल की सड़कों पर भी दिख रहा है। आने वाले समय में यह विवाद राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रहेगा।

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