भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, पीएम मोदी से मांगा जवाब
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस ने कई सवाल उठाए हैं. पार्टी ने बाजार खोलने, रूस से तेल खरीद, कृषि क्षेत्र पर असर और ‘मेक इन इंडिया’ को लेकर चिंता जताई है तथा सरकार से डील की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है.

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित व्यापार समझौते को लेकर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस पार्टी ने इस डील पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार से पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि जिस तरह पहले संघर्षविराम की घोषणा अमेरिका की ओर से हुई थी, उसी तरह इस व्यापार समझौते की जानकारी भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी.
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बताया जा रहा है कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध पर हुआ है. साथ ही, ट्रंप के बयान के हवाले से यह दावा किया गया कि भारत अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को लगभग शून्य कर देगा.
कांग्रेस का कहना है कि अगर भारत अपना बाजार पूरी तरह खोल देता है, तो इसका असर देश की उद्योग, छोटे व्यापारियों और किसानों पर पड़ सकता है. पार्टी ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या इस डील के तहत भारतीय कृषि बाजार भी अमेरिका के लिए खोल दिया जाएगा. अगर ऐसा है तो किसानों के हितों की रक्षा कैसे होगी?
रूस से तेल खरीद पर भी सवाल
कांग्रेस ने यह भी कहा कि खबरों में यह बात सामने आई है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करेगा या बंद करेगा और उसकी जगह अमेरिका तथा वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. पार्टी ने पूछा कि क्या सरकार इस शर्त पर सहमत हो गई है? साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर सामान खरीदेगा. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर आयात बढ़ेगा तो ‘मेक इन इंडिया’ पहल का क्या होगा? क्या इससे घरेलू उत्पादन प्रभावित नहीं होगा?
संसद में जानकारी देने की मांग
कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े व्यापार समझौते की पूरी जानकारी संसद और देश के सामने रखी जानी चाहिए. पार्टी ने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि इस डील की शर्तें क्या हैं और भारत ने किन प्रतिबद्धताओं पर सहमति दी है. कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता की अपेक्षा करती है. पार्टी का कहना है कि व्यापार समझौते का असर देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और उद्योग पर पड़ सकता है, इसलिए सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना जरूरी है.
रणनीतिक स्वायत्तता पर चिंता
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अगर भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदेगा, तो इससे देश की रणनीतिक स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने भारतीय आयात पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन भारत की ओर से अमेरिकी उत्पादों पर क्या रुख अपनाया गया है, यह स्पष्ट होना चाहिए.


