दिल्ली में निजी स्कूलों को राहत! इस साल लागू नहीं होगा फीस नियंत्रण कानून
दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2025-26 सत्र में निजी स्कूलों पर नया फीस विनियमन कानून लागू नहीं होगा. फिलहाल पुरानी फीस संरचना जारी रहेगी, जबकि कानून की वैधता पर मामला अदालत में लंबित है.

नई दिल्ली: दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह इस शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में नया शुल्क विनियमन कानून लागू नहीं करेगी. यह फैसला अदालत की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें मौजूदा सत्र में कानून लागू करने की जल्दबाजी पर सवाल उठाए गए थे.
दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 को लागू करने का फैसला सरकार ने हाल ही में किया था. इस कानून का उद्देश्य निजी स्कूलों की फीस तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और अभिभावकों को राहत देना था. हालांकि, कई निजी स्कूलों ने इसका विरोध किया और शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से इसे लागू करने पर रोक लगाने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया. स्कूलों का कहना था कि सत्र के बीच में नई व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलों को किया समाप्त
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट में 1 फरवरी को जारी एक राजपत्र अधिसूचना पेश की. इसमें साफ कहा गया है कि 1 अप्रैल 2025 से पहले जो फीस ली जा रही थी, उसी के अनुसार 2025-26 सत्र में शुल्क लिया जाएगा. स्कूल अतिरिक्त फीस नहीं वसूलेंगे.
अदालत ने इस पर गौर करते हुए कहा कि उसकी चिंता केवल इस बात को लेकर थी कि कानून को बहुत जल्द लागू करने की कोशिश हो रही थी. स्पष्टीकरण मिलने के बाद पीठ ने आगे कोई आदेश देने की जरूरत नहीं समझी और अपीलों को समाप्त कर दिया.
सरकार ने साफ किया रुख
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून रद्द नहीं किया गया है. केवल इसके कार्यान्वयन को फिलहाल टाल दिया गया है. सरकार का कहना है कि प्रक्रियात्मक अड़चनें दूर होने के बाद इसे लागू किया जाएगा. 1 फरवरी को जारी अधिसूचना में यह भी माना गया कि शुल्क विनियमन समितियों के गठन की समय सीमा पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि कानून दिसंबर 2025 में ही अधिसूचित हुआ था.
स्कूलों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
निजी स्कूलों ने इस फैसले को राहत बताया है. उनका कहना है कि इससे उन्हें नए प्रावधानों को समझने और लागू करने के लिए समय मिलेगा. दूसरी ओर, अभिभावक संगठनों ने समयसीमा पर स्पष्टता का स्वागत किया, लेकिन फीस बढ़ोतरी की चिंता जताई. कुछ अभिभावकों ने यह भी कहा कि शुल्क विनियमन समितियों में उनकी भागीदारी सीमित है और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है.


