IB और पुलिस के लोग मेरा पीछा करते...SC में सोनम वांगचुक की पत्नी बोली- मेरे मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा

Geetanjali Angmo : पर्यावरणविद्ध और समाजिक कार्यकर्ता गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है. अपने हलफनामे में उन्होंने आईबी के सर्विलांस और राजस्थान पुलिस पर पीछा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने यह भी कहा कि इसके चलते उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Geetanjali Angmo : लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में बताया है कि उनके पीछे लगातार भारत की खुफिया एजेंसी (आईबी) की निगरानी (सर्विलांस) लगी हुई है. उन्होंने कहा कि इस निगरानी के कारण उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधान में मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.

जोधपुर में पति से मिलने के दौरान मिली कड़ी निगरानी

आपको बता दें कि गीतांजलि ने आगे बताया कि जब वह जोधपुर के केंद्रीय कारागार में अपने पति से मिलने गईं, तब भी राजस्थान पुलिस और आईबी की टीम ने उनका पीछा किया. इस दौरान उनकी हर गतिविधि अधिकारियों की कड़ी निगरानी में थी. जोधपुर हवाई अड्डे पर पहुंचते ही उन्हें सीधे पुलिस वाहन में बिठा लिया गया और जेल के अंदर उनकी बातचीत के दौरान अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों ने उनकी बातचीत के नोट्स भी बनाए.

निगरानी से उत्पन्न हो रहा अधिकारों का हनन
गीतांजलि ने इस सर्विलांस को अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताया. उन्होंने कहा कि एक नागरिक के तौर पर उन्हें बिना किसी रोक-टोक के अपने पति से मिलने और कहीं भी जाने का अधिकार है. पुलिस द्वारा उनकी आवाजाही पर लगाई गई रोक असंवैधानिक है. उनका यह भी कहना है कि निजता के अधिकार के तहत उनकी और उनके पति की बातचीत किसी तीसरे पक्ष द्वारा नहीं सुनी जानी चाहिए.

संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन
गीतांजलि ने स्पष्ट किया कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा की जा रही निगरानी और प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता के अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में न्याय की मांग की है ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके.

निजता के महत्व पर ध्यान दिलाने की कोशिश
इस पूरे मामले में गीतांजलि आंगमो ने अपनी आवाज उठाकर देश में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और निजता के महत्व पर ध्यान दिलाने की कोशिश की है. उनका कहना है कि कोई भी नागरिक अपने मूल अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, चाहे वह किसी भी कारण से क्यों न हो.

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