'महाप्लान' को लेकर पीएम आवास पर अहम मीटिंग, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और सीडीएस रहे मौजूद
पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगातार प्रधानमंत्री आवास पर लगातार एक के बाद एक बैठकों का दौरा जारी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस अनिल चौहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास पर पहुंचे.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगातार प्रधानमंत्री आवास पर लगातार एक के बाद एक बैठकों का दौरा जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने आधिकारिक आवास पर एक अहम बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई. इस हाईलेवल मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और सीडीएस अनिल चौहान समेत तीनों सेनाओं के चीफ भी मौजूद रहे.
बैठक ऐसे समय पर हुई है जब केंद्र सरकार सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक की तैयारी कर रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के अहम फैसले लेने वाली सर्वोच्च सरकारी संस्था है. पीएम मोदी द्वारा की गई समीक्षा बैठक को एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जो सरकार के आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ के दृष्टिकोण को दर्शाता है.
पहलगाम हमला: गंभीर चिंता का विषय
पिछले हफ्ते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस हमले में कुल 26 नागरिकों की जान चली गई. प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी शाखा 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. हमला करने वाले पांच आतंकवादी अब भी फरार हैं और उनकी तलाश में सुरक्षा बलों द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पहल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने हमले में पाकिस्तान की भूमिका से जुड़े सबूत एकत्र किए हैं. इन प्रमाणों को हाल ही में अमेरिका, रूस, चीन, जापान सहित प्रमुख यूरोपीय देशों के राजनयिकों के साथ साझा किया गया. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अब एक वैश्विक खतरा बन चुका है और इसके खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है.
भारत-पाक संबंधों में बढ़ा तनाव
इस आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों में और कड़वाहट आ गई है. दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ राजनयिक कदम उठाए हैं, जिनमें वीजा निलंबन, शिमला समझौते की समीक्षा, और सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार जैसे कदम शामिल हैं. भारत ने यह भी संकेत दिया है कि द्विपक्षीय बातचीत और सहयोग तब तक संभव नहीं है जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देना बंद नहीं करता.
पीएम मोदी का सख्त संदेश
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश आतंकवाद के सामने झुकने वाला नहीं है और भारत की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने दोहराया कि "आतंकवाद के नापाक इरादों को सफल नहीं होने दिया जाएगा" और जरूरत पड़ी तो देश अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा.
यह बैठक न सिर्फ हालिया घटनाओं पर सरकार की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ और भी कठोर कदम उठाए जाने के संकेत देती है.


