टीपू सुल्तान की अंगूठी पर ‘राम’ लिखा... महाराष्ट्र में इतिहास पर सियासत गरम, ओवैसी ने BJP को घेरा
महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी महाराज से करने पर विवाद बढ़ गया. मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसे निंदनीय बताया, जबकि ओवैसी ने टीपू को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला शासक और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया.

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है. इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं, और बयानबाजी तेज हो गई है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बुलढाणा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना की थी.
हर्षवर्धन सपकाल का यह बयान मालेगांव नगर निगम की उप-महापौर के दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया. इस मुद्दे का स्थानीय स्तर पर कुछ संगठनों और शिवसेना पार्षदों ने विरोध किया था. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस टिप्पणी को निंदनीय बताया और कहा कि ऐसी तुलना करना गलत है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता को अपने बयान पर शर्म आनी चाहिए.
ओवैसी का पलटवार
इस विवाद में अब असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं. उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि टीपू सुल्तान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले शासक थे और उन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया. ओवैसी ने कहा कि 1799 में टीपू सुल्तान की शहादत हुई और उन्होंने अंग्रेजों के सामने झुकने के बजाय लड़ते हुए प्राण दिए.
ओवैसी ने यह भी दावा किया कि टीपू सुल्तान के पास से मिली अंगूठी पर ‘राम’ लिखा था और इसकी नीलामी भी हो चुकी है. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की किताब ‘विंग्स ऑफ फायर’ का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें रॉकेट तकनीक के संदर्भ में टीपू का उल्लेख है.
गांधी का हवाला
ओवैसी ने महात्मा गांधी का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने भी अपने लेखों में टीपू सुल्तान को हिंदू-मुस्लिम एकता का समर्थक बताया था. उन्होंने यह भी कहा कि टीपू के शासन में कई हिंदू अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर थे और श्रृंगेरी मठ के पुनर्निर्माण का उदाहरण दिया.
इस पूरे मामले ने राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया है. भाजपा जहां कांग्रेस पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि टीपू सुल्तान को लेकर तथ्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है.


