"मैं दरिंदों से हार गया...", सुसाइड नोट में छलका सिरसा जेल वार्डन का दर्द, DSP और LO पर लगाए आरोप

हरियाणा के सिरसा जिला जेल में तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने कथित मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली. सुसाइड नोट में उन्होंने DSP और LO पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं.

हरियाणा के सिरसा जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है. जिला जेल में तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने कथित मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. मरने से पहले वार्डन ने 2 सुसाइड नोट भी छोड़े, जिसमें उन्होंने DSP समेत 2 अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया हैं. इस घटना ने पूरे जेल प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मृतक वार्डन सुखदेव सिंह पिछले सात वर्षों से सिरसा जिला जेल में सेवाएं दे रहे थे. परिजनों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से ड्यूटी को लेकर उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा जा रहा था. सुखदेव सिंह दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और उनके दिल में दो स्टंट लगे हुए थे. इसी वजह से उन्होंने अधिकारियों से रात की ड्यूटी न लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन आरोप है कि इसी बात पर उन्हें अपमानित किया गया और लगातार प्रताड़ित किया गया.

बेटे को फोन कर बताया-  यह कदम उठा रहा हूं 

आत्महत्या से पहले सुखदेव सिंह ने दो सुसाइड नोट लिखे, जिनमें उन्होंने जेल के डीएसपी और एलओ (लाइन ऑफिसर) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. नोट में उन्होंने लिखा कि ड्यूटी को लेकर उन्हें बार-बार तंग किया गया, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया और इसके बावजूद उन्हें ड्यूटी से वंचित रखा गया. उन्होंने खुद को मानसिक रूप से टूट चुका बताया और इंसाफ की गुहार लगाई.

वहीं, घटना से पहले सुखदेव सिंह ने अपने बेटे को फोन कर बताया कि वह अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर यह कदम उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके बैग में सुसाइड नोट रखा है और परिवार से अपना और मां का ख्याल रखने की बात कही. यह कॉल परिवार के लिए सबसे दर्दनाक पल साबित हुई.

'बेटा! मैं दरिंदों से हार गया, मां का ख्‍याल रखना'

सुखदेव सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि वे पिछले सात साल से सिरसा जिला जेल में वार्डन के पद पर काम कर रहे थे और पिछले छह साल से दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. 14 दिसंबर को उन्होंने डीएसपी सिक्योरिटी से रात की ड्यूटी न लगाने की गुजारिश की, लेकिन इस पर अधिकारी नाराज हो गए और उन्हें अपमानित किया गया. इसके बाद करीब 15 दिनों तक उन्हें लगातार परेशान किया गया. 

उन्होंने आगे लिखा कि 31 दिसंबर की शाम भी उनके साथ बदसलूकी की गई. नए साल के दिन उन्होंने जेल सुपरिंटेंडेंट और गार्ड के सामने माफी मांगी, फिर भी एलओ और डीएसपी ने उन्हें पूरे दिन खड़ा रखा और ड्यूटी पर नहीं लिया. अंत में बेटे से माफी मांगते हुए उन्होंने लिखा कि, "बेटा, मैं दरिंदों से हार गया. बेटे, मुझे माफ कर देना. हिमांशु और अपनी मां और अंजु का ख्याल रखना. आई लव यू."

इलाज के दौरान हुई मौत

परिजनों के मुताबिक, सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचे और सुखदेव सिंह को पहले सिविल अस्पताल और फिर एक निजी अस्पताल ले जाया गया. हालांकि, हालत गंभीर होने के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे.

परिजनों के गंभीर आरोप

मृतक के बेटे और पिता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि दोनों अधिकारी सुखदेव सिंह को लगातार परेशान कर रहे थे. परिवार का यह भी आरोप है कि उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे वह मानसिक रूप से और टूट गए. परिजनों ने इस मामले में सिरसा पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है. परिवार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक आरोपित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, वे शव नहीं लेंगे. उन्होंने जेल के डीएसपी और एलओ के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

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