स्पीकर सर, आप बता दीजिए मुझे क्या बोलना चाहिए...राहुल गांधी के बयान पर बोले ओम बिरला- मैं आपका सलाहकार नहीं हूं
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के द्वारा किताब में लिखे गए कोट पढ़ने लगे. बिना पुष्टि के कोट पढ़ने पर राजनाथ सिंह, अमित शाह समेत कई सत्तारूढ़ सांसदों द्वार इसका विरोध किया गया. स्पीकर ओम बिरला ने भी उन्हें कड़ी चेतावनी दी. ऐसे में आइए जानते है कि क्या है यह पूरा मामला

नई दिल्ली : लोकसभा में बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी और स्पीकर ओम बिरला के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान एक पूर्व सैन्य जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के द्वारा अप्रकाशित संस्मरणों के हवाले से कोट पढ़ने का प्रयास किया. इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नियमों का हवाला देकर आपत्ति जताई, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को चेतावनी दी.
सदन को नियमों के अनुसार चलाना मेरा काम...ओम बिरला
आपको बता दें कि स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को सदन के नियमों का पालन करने की चेतावनी देते हुए कहा, “विपक्ष के नेता के रूप में आप सदन में आरोप लगा रहे हैं और नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. यह उचित नहीं है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभापति के रूप में उनका काम सदन को नियमों के अनुसार चलाना है, न कि सदस्यों को यह बताना कि उन्हें क्या कहना चाहिए.
राहुल गांधी के “कृपया आप मुझे बताएं कि क्या कहना है” कहने पर, बिरला ने जवाब दिया, “मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, लेकिन बतौर लोकसभा अध्यक्ष, यह मेरा कर्तव्य है कि सदन नियमों के मुताबिक चले और चर्चा सूचीबद्ध विषयों तक ही सीमित रहे.”
VIDEO | Lok Sabha Speaker Om Birla (@ombirlakota) says, “As Leader of the Opposition, you are making allegations in the House and not following the rules. This is not appropriate.”
— Press Trust of India (@PTI_News) February 2, 2026
In response, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, “You please tell me what I should speak, Speaker… pic.twitter.com/bRzYzLVh76
राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख के कोट को पढ़ना चाहा
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख किया, जिन्होंने कथित तौर पर कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल उठाए थे. राहुल ने इसका जवाब देने के लिए एक पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहा, जिसमें भारत-चीन सैन्य तनाव का उल्लेख था. राहुल गांधी का मुख्य उद्देश्य चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का मुद्दा उठाना था.
उन्होंने दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बारे में भी अपने संस्मरण में उल्लेख किया है. हालांकि, जब उन्हें इसे पढ़ने से रोका गया, तो उन्होंने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि चीन के साथ भारत के रिश्ते के बारे में बात रखना चाहते हैं.
राजनाथ सिंह ने सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं. गृह मंत्री अमित शाह ने भी विरोध जताया और कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे.
गतिरोध के बाद बैठक तीन बजे तक के लिए स्थगित
हालांकि, लगातार गतिरोध बने रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोपहर दो बजकर नौ मिनट पर सभा की बैठक तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी. तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर फिर हंगामा हुआ, जिसके बाद इसे 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. इस घटना के दौरान सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई.
संसदीय नियमों के अनुसार...
बता दें कि संसदीय नियमों के अनुसार, सदस्य अप्रकाशित पुस्तकों, संस्मरणों या पत्रिकाओं से सीधे उद्धरण नहीं पढ़ सकते हैं. इसके अलावा, जब कोई सदस्य किसी प्रकाशित सामग्री का हवाला देता है, तो उसे उस सामग्री की प्रामाणिकता सुनिश्चित करनी होती है और आवश्यकता पड़ने पर उसे सदन के पटल पर रखना होता है. लोकसभा अध्यक्ष का कर्तव्य है कि वे सदन की कार्यवाही को नियमों के अनुसार संचालित करें और यह सुनिश्चित करें कि चर्चा सूचीबद्ध विषयों तक ही सीमित रहे. इस मामले में, स्पीकर ओम बिरला ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए राहुल गांधी को अप्रकाशित सामग्री से उद्धरण पढ़ने से रोका.
सरकार को घेरना चाहते थे राहुल गांधी
यह विवाद केवल संसदीय नियमों का मामला नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक महत्व भी है. राहुल गांधी चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरना चाहते थे, जबकि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से बचना चाहती थी. विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि सरकार चीन के साथ सीमा विवाद पर पारदर्शिता नहीं बरत रही है और सच्चाई को छिपा रही है. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर है और उचित कदम उठा रही है.


