बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की बढ़ी मुश्किलें, इन दो मामलों में सुनाई गई 10 साल की सजा
ढाका की विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पुरबाचोल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में भूखंड आवंटन घोटाले के दो मामलों में कुल 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई. उनके भतीजे-भतीजी और अन्य को भी सजा मिली. हसीना भारत में निर्वासित हैं.

नई दिल्लीः ढाका एक विशेष अदालत ने सोमवार को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भ्रष्टाचार के दो अलग-अलग मामलों में कुल 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई. ये मामले राजधानी ढाका के पास पुरबाचोल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में सरकारी भूखंडों के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े हैं. हसीना पिछले साल अगस्त से भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं और अदालत ने उन्हें पहले ही भगोड़ा घोषित कर दिया था.
पुरबाचोल प्रोजेक्ट में भूमि घोटाले का मामला
राजधानी उन्नयन कर्तृपक्ष (राजुक) के तहत चल रहे पुरबाचोल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में 10-कथा के भूखंडों के आवंटन में सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा था. एंटी-करप्शन कमीशन (एसीसी) ने दावा किया कि आरोपियों ने नियमों का उल्लंघन कर, गलत जानकारी देकर या प्रभाव का इस्तेमाल कर इन भूखंडों को हासिल किया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, हसीना ने अपने पद का दुरुपयोग कर परिवार के सदस्यों को लाभ पहुंचाया, जबकि वे पात्र नहीं थे.
ढाका स्पेशल जज कोर्ट-4 के जज रबीउल आलम ने दोपहर करीब 12:30 बजे फैसला सुनाया. शेख हसीना को दोनों मामलों में 5-5 साल की सजा दी गई, जो कुल 10 साल बनती है. अदालत ने सभी दोषियों पर 1 लाख टका का जुर्माना भी लगाया. जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त 6 महीने की जेल होगी.
परिवार के सदस्यों को भी सजा
हसीना के साथ उनके भतीजे रादवान मुजीब सिद्दीक (बॉबी) और भतीजी अजमीना सिद्दीक को दोनों मामलों में 7-7 साल की सजा मिली. ब्रिटिश सांसद और हसीना की भतीजी ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक को प्रत्येक मामले में 2 साल, कुल 4 साल की कैद हुई. एक अन्य आरोपी, राजुक के पूर्व सदस्य मोहम्मद खुर्शीद आलम, जो अदालत में आत्मसमर्पण करने वाले एकमात्र व्यक्ति थे, को कुल 2 साल की सजा मिली.
अदालत ने दोषियों के आवंटित भूखंडों को रद्द करने का भी आदेश दिया. ये फैसले उन कई मामलों की कड़ी हैं, जिनमें हसीना और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. इससे पहले भी पुरबाचोल प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य मामलों में हसीना को कुल 26 साल की सजा हो चुकी है.
हसीना का निर्वासन
शेख हसीना पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद देश छोड़कर भारत चली गई थीं. तब से वे भारत में हैं और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है. एसीसी ने इन मामलों में कई अन्य अधिकारियों और राजुक कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया था, जिनमें से कुछ को 5 साल की सजा मिली है.
यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में हसीना के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है. विपक्षी दल इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि हसीना के समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई कहते हैं. हसीना और ट्यूलिप सिद्दीक ने पहले भी ऐसे फैसलों को खारिज किया है, दावा किया है कि वे निर्दोष हैं और प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण है.


