बीजेपी का एजेंट है EC, चुनाव आयुक्त हैं अहंकारी...SIR पर सीईसी से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी का बड़ा बयान

ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से 90 मिनट की मुलाकात के बाद एसआईआर में 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया और आयोग को भाजपा का एजेंट बताया. उन्होंने अल्पसंख्यक-एससी को टारगेट करने, बीएलओ पर दबाव और अपमान का दावा किया. बैठक में बहिष्कार किया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से करीब 90 मिनट की मुलाकात के बाद चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाने का आरोप लगाया और आयोग को भाजपा का एजेंट बताया. बनर्जी ने कहा कि आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है.

एसआईआर पर ममता के आरोप

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ममता ने बताया कि बंगाल में नामों की मामूली वर्तनी गलतियां या बदलाव के कारण मतदाताओं के दावे रद्द हो रहे हैं. उन्होंने उदाहरण दिए कि बनर्जी को बंद्योपाध्याय, मुखर्जी को मुखोपाध्याय या चटर्जी को चट्टोपाध्याय लिखने पर नाम काट दिए जा रहे हैं. बंगाल में उपनाम बदलते हैं, लोग अपनी उपाधियां बदलते हैं, लेकिन इन्हें असंगतता बताकर सूची से हटा दिया जा रहा है, उन्होंने कहा. ममता का दावा है कि 58 लाख मतदाताओं के नाम बिना किसी सुनवाई के हटा दिए गए. उन्होंने पूछा कि चुनाव आयोग ने पूछा तक नहीं?

मुख्यमंत्री ने बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) पर दबाव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है. ममता ने सवाल किया कि एससी और अल्पसंख्यकों को क्यों टारगेट किया जा रहा है? क्या वे इंसान नहीं हैं?

भाजपा शासित राज्यों पर सवाल

ममता ने एसआईआर की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों चलाई जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित असम में ऐसा नहीं हो रहा, जबकि बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे गैर-भाजपा राज्यों को निशाना बनाया जा रहा है.  असम में भाजपा सरकार है, इसलिए वहां कोई अभियान नहीं. आप चुनिंदा राज्यों को टारगेट कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भूमि रिकॉर्ड या सेकेंडरी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन बंगाल के लिए नियम बदल दिए गए. ममता ने आयोग को भाजपा का एजेंट करार दिया.

बैठक में विवाद 

बनर्जी ने बताया कि बैठक में उन्हें अपमानित किया गया. उन्होंने कहा कि मैंने बहिष्कार किया और बाहर आ गई. मुख्य चुनाव आयुक्त बहुत अहंकारी हैं. हमें दुर्व्यवहार किया गया. उन्होंने दावा किया कि आयोग ने झूठ का पुलिंदा दिया और टीएमसी पर डुप्लिकेट मतदाताओं का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया. ममता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन और मीडिया पहुंच प्रतिबंधित करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा मुख्य चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा.

हालांकि, सूत्रों ने बताया कि सीईसी ने टीएमसी के आरोपों का खंडन किया और कहा कि कानून का पालन होगा. आयोग ने टीएमसी विधायकों की अपमानजनक भाषा और चुनाव अधिकारियों को धमकी देने पर चिंता जताई. एसडीओ-बीडीओ कार्यालयों में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़फोड़ का मुद्दा भी उठाया गया. आयोग ने बीएलओ को मानदेय (18,000 में से केवल 7,000 दिए गए) की देरी और स्टाफ की कमी पर ध्यान दिलाया.

काले कपड़ों में विरोध प्रदर्शन

मुलाकात में टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी और एसआईआर से प्रभावित 12 परिवारों के सदस्य शामिल थे. ये परिवार उन लोगों के थे जिन्हें गलत मृत घोषित किया गया या तनाव से मौत हुई. प्रतिनिधिमंडल ने काले कपड़े पहनकर विरोध जताया. ईसीआई बाहर पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई. ममता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों का समर्थन किया और चेतावनी दी कि अगर भाजपा सत्ता में रही तभी आपकी कुर्सी बचेगी. आज कुर्सी बचा सकते हैं, कल नहीं.

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