भारत की तरक्की से वैश्विक स्थिरता: FTA से पहले EU प्रमुख का बड़ा बयान
भारत-यूरोपीय संघ के ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते से पहले यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि "एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है."

नई दिल्ली: भारत-यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से पहले यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि "एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है", और इसका लाभ वैश्विक समुदाय को मिलता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच वर्षों से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी चल रही है.
गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित 77वें राष्ट्रीय समारोह में शामिल हुईं उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए. कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में उनकी मौजूदगी ने इस बात को और मजबूत किया कि दोनों पक्ष रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के मूड में हैं.
कर्तव्य पथ पर यूरोपीय नेतृत्व की मौजूदगी
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके साथ पारंपरिक बग्गी में कर्तव्य पथ पहुंचीं, जहां राष्ट्रपति ने परेड की सलामी ली. यह दृश्य भारत-यूरोप संबंधों की बढ़ती निकटता का प्रतीक बना.
एक सफल भारत, दुनिया के लिए लाभकारी
गणतंत्र दिवस समारोह के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए वॉन डेर लेयेन ने लिखा, "गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होना मेरे लिए जीवन भर का सम्मान है. एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है. और हम सभी को इसका लाभ मिलता है."
उनका यह बयान भारत-ईयू शिखर सम्मेलन से पहले आया है, जिसे दोनों पक्षों के लिए निर्णायक माना जा रहा है.
27 जनवरी को भारत-EU शिखर सम्मेलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत के निष्कर्ष की घोषणा कर सकते हैं. यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को नया आयाम देने वाला माना जा रहा है.
यूरोपीय संघ बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. यूरोपीय संघ इस समय भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित एफटीए से वाणिज्यिक रिश्तों में उल्लेखनीय तेजी आएगी.
वैश्विक अनिश्चितता के बीच रणनीतिक कदम
व्यापार की मात्रा के अलावा, इस समझौते से भारत-ईयू संबंधों में गुणात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है. खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका की टैरिफ-आधारित नीतियों के कारण वैश्विक व्यापार में अस्थिरता देखी जा रही है, भारत और यूरोपीय संघ आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
2007 से 2022 तक का लंबा सफर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन महत्वाकांक्षा के स्तर को लेकर मतभेदों के चलते 2013 में वार्ता रोक दी गई. लगभग एक दशक बाद जून 2022 में इस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है.
कारों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती के संकेत
इससे पहले, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावित एफटीए के तहत भारत यूरोपीय संघ से आयातित कारों पर शुल्क को मौजूदा 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत तक करने पर सहमत हो सकता है. वार्ता से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जिन कारों की आयात कीमत करीब 16.3 लाख रुपये (17,739 अमेरिकी डॉलर) से अधिक होगी, उन पर तत्काल शुल्क कटौती की संभावना है. भविष्य में यह शुल्क घटकर 10 प्रतिशत तक आ सकता है.


