बेंगलुरु के डरावनी आंखों वाली महिला का हुआ खुलासा, सामने आई उसकी असली पहचान
कर्नाटक में निर्माणाधीन इमारतों पर एक साड़ी पहने महिला की तस्वीर बार-बार दिखने से लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई. बेंगलुरु की एक महिला ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद पोस्ट वायरल हो गया. यूज़र्स ने इसे नजरबट्टू, ‘दृष्टि गोम्बे’ या मीम संस्कृति से जुड़ा प्रतीक बताया है.

कर्नाटक : शहर में रोजाना आते-जाते समय अक्सर हम नई दुकानों, सड़कों के किनारे लगे पोस्टरों और निर्माणाधीन इमारतों को अनदेखा कर देते हैं. लेकिन बेंगलुरु में रहने वाली एक महिला ने अपनी यात्राओं के दौरान एक ऐसी चीज़ पर ध्यान दिया, जो हर बार उनकी नज़र में आ जाती थी. बेंगलुरु से बाहर कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में, जहाँ भी निर्माण कार्य चल रहा था, वहाँ एक जैसी महिला की तस्वीर टंगी दिखाई देती थी.
एक ही चेहरे की बार-बार मौजूदगी
I see this woman everywhere in Karnataka outside bangalore where there’s a construction happening. I tried google lens to check for discussions but can’t find any details. Who is she? pic.twitter.com/RAgMDXXJMt
— unc unitechy (@unitechy) January 5, 2026
महिला ने इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की
महिला ने पहले खुद इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की. उन्होंने तस्वीर को ज़ूम किया, डिजिटल टूल्स की मदद ली, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी. अंततः उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी जिज्ञासा साझा की और आम लोगों से सवाल पूछा. यही पोस्ट कुछ ही समय में चर्चा का विषय बन गई.
लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी
पोस्ट के वायरल होते ही लोगों ने अपनी-अपनी व्याख्याएं देना शुरू कर दीं. कई लोगों का मानना था कि यह तस्वीर निर्माण स्थल को बुरी नज़र और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए लगाई जाती है. कुछ ने इसे पारंपरिक ‘दृष्टि गोम्बे’ की आधुनिक और मज़ाकिया प्रस्तुति बताया, जो पहले आमतौर पर डरावने रूप में दिखाई देती थी.
This lady is Niharika Rao, a You Tuber. Hundreds of people in Karnataka are putting up her photo in front of their shops, houses, farms to ward off negativity (drishti)
— 𝕲𝖆𝖓𝖊𝖘𝖍 * (@ggganeshh) May 16, 2024
This, is the true power of feminism pic.twitter.com/xsPRbFX7OD
पोस्टर केवल अंधविश्वास का प्रतीक नहीं, बल्कि
कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी सामने आया कि यह चेहरा सोशल मीडिया मीम संस्कृति से जुड़ा है और किसी पुराने वायरल वीडियो से लिया गया है. आस्था, मज़ाक और इंटरनेट ट्रेंड के इस मेल ने तस्वीर को और भी रोचक बना दिया. आज यह पोस्टर केवल एक अंधविश्वास का प्रतीक नहीं, बल्कि शहरी जीवन और डिजिटल संस्कृति के आपसी प्रभाव का उदाहरण बन चुका है.
लोकविश्वास और आधुनिक समाज का संगम
यह पूरी घटना दिखाती है कि कैसे परंपरागत मान्यताएं समय के साथ नए रूप ले लेती हैं. निर्माण स्थलों पर टंगी यह तस्वीर न सिर्फ लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रही है, बल्कि यह भी बताती है कि आधुनिक शहरों में भी लोकविश्वास और सोशल मीडिया किस तरह साथ-साथ चलते हैं.


