जंग की आहट तेज! ईरान पर दबाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव, इजरायल को क्यों भेज रहे अरबों डॉलर के हथियार?

ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को अरबों डॉलर के बड़े हथियार पैकेज को मंजूरी दे दी है. अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार देर रात घोषणा करते हुए बताया कि 6.67 अरब डॉलर का रक्षा पैकेज इजरायल की सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगा.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते मध्य पूर्व में लगातार युद्ध जैसे हालात बने हुए. इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को अरबों डॉलर के बड़े हथियार पैकेज को मंजूरी दे दी है. अमेरिका के इस कदम से साफ है कि वो इजराइल को मजबूत सैन्य और राजनीतिक समर्थन देगा. बता दें कि मध्य पूर्व में सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच के रिश्ते बेहत तनावपूर्ण हैं. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी यह तनाव वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है

अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार देर रात घोषणा करते हुए बताया कि 6.67 अरब डॉलर का रक्षा पैकेज इजरायल की सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगा. इस पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा 30 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ आधुनिक हथियार, रॉकेट सिस्टम और अत्याधुनिक लक्ष्यीकरण प्रणालियों है. केवल इस हिस्से की कीमत लगभग 3.8 अरब डॉलर है. इन हेलीकॉप्टर को विशेष रूप से युद्ध अभियानों के लिए तैयार किए गए हैं, जो इजराइल की वायु शक्ति को मजबूत करेंगे. 

इसके साथ ही, अमेरिका द्वारा इजरायल को 3,250 हल्के सामरिक वाहन भी दिए जाएंगे. जिनकी कुल लागत करीब 1.98 अरब डॉलर है. इन वाहनों के जरिए इजरायली सेना सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामान को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा सकेगी. लंबे सैन्य अभियानों के लिए ये वाहन महत्वपूर्ण माने जा रहे है.

क्या है अमेरिका का मकसद?

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस डील का उद्देश्य इजरायल की आत्मरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है. हालांकि ये डील ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार उस पर दबाव बढ़ा रहा है

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु समझौते को लेकर साफ संदेश भेज दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी युद्धपोत इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के साथ वहां तैनात हैं.

क्या बातचीत की संभावना है?

दूसरी ओर, तनाव के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि बातचीत संभव है, लेकिन तब जब वह निष्पक्ष और बराबरी के आधार पर हो. हालांकि उन्होंने ये भी बताया कि अभी तक किसी आधिकारिक बैठक की योजना तय नहीं हुई है.

इसके बावजूद अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान की नीयत पर पूरी तरह भरोसा नहीं जता रहे हैं. उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते के बाद ईरान द्वारा निर्धारित सीमाओं के उल्लंघन और निरीक्षकों के साथ सहयोग में कमी का हवाला दिया हैं. वहीं, जून 2025 में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ गया.

ट्रंप ने दी चेतावनी

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समय तेजी से निकल रहा है. उन्होंने ईरान से परमाणु गतिविधियां रोकने और देश के अंदर चल रही हिंसा समाप्त करने की मांग की है. इसके साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर बात आगे नहीं बढ़ी तो सैन्य विकल्प भी खुले हैं.

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